Saturday, 29 August 2020

(घ) विश्वमित्र, मंत्रदृष्टा।


*ऋग्वेद मंडल ३ : ३३ : १ 
*ऋषि मुनि विश्वामित्र* 

*विश्वामित्र – वेद, गायत्री मंत्र निर्माता.*
*विश्वामित्र – राम का गुरु.*
*विश्वामित्र – राजा भरत का नानु.*

विश्वामित्र की उपस्थिति तीनों युग में दिखाई देती है। सत युग, त्रेता युग और व्दापर युग, एक युग लाखों सालों का होता है। कोई आदमी लाखों साल कैसे जी सकता है। ये तीनों Situation एक समय कि नहीं हो सकती. या तो वेद वाला विश्वामित्र सही हो सकता है,या फिर रामायण वाला,या फिर महाभारत वाला, या फिर ४ युग का concept हि गलत होगा. सच तो यही है कि विश्वामित्र नाम से तीनो कहानी किसी 3rd आदमी ने बनाई है. 

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परंतु दयानंद ने , रघुनंद ने , भगवत नर , कपिलदेव ने ,उमाशंकर ने आदि आदि ने इनको मंत्रद्रष्टा औऱ मंत्रकर्ता मानते हैं ।

और वेद को अपौरुषेय मानते हैं ।

और निरुक्त 7 .1 कुछ और ही कहता है , वैसे ही आचार्य दुर्ग भी निरुक्त वृति भी यास्क का समर्थन करती है थोड़ा बहुत मत भेद के बाद ।

परतु अपौरुषेय के लिए सब खोखली दलील है , जिसका आसानी से रद्द किया जा सकता , बस ये एक मान्यता है ।

700 मंत्र की  मंत्रद्रष्टा ऋषिया भी है जिसका उदाहरण सीता , सरस्वती आदि आदि ।

चलो मान लिया कि वे मंत्रद्रष्टा ऋषि है , पर जड़ थे या चेतन ? 

जड़ हो नही सकते ? क्योंकि निरुक्त 7 . 1 का खंड हो जाएगा ।

सब का निष्कर्ष ये निकला कि सब मे चेतना थी , अमुक अमुक काल मे कई ऋषि मंत्रद्रष्टा जिसमे से वैवस्वत मनु भी एक था , बाकी सब की बोइग्राफी कहा है जिससे हम माने की ये मंत्र के ऋषि जुटा , सच्चा या नही था , कमाल है किसी से भी ले ली जाती है , आज एक काम करता हु , एक किसी मंत्र में ऋषि का नाम अमिताभ बच्चन लिख देता हूं , वो भी ऋषि है । 

निरुक्त 13 में यास्क लिखता है , की एक ऋषि एवं तपस्वी ही वेद का गुड़ समझ सकता है ? 

किसी ऋषि में कौनसे गुण की  आवश्कता होती है जो उसको ऋषि बनाती है ? 
आप खुद उसका म्यार तय करे फिर उस पर वेद के केवल 10% ऋषि को उस मे फिट करे प्रमाण और तथ्य के साथ मानने की वेद में कुछ दम है , वैसे वेद एक अज्ञानी व्यक्ति का प्रयास है ,की उसको पता नही होता कि  उसने किस वेद में क्या लिखा , खुद ही एक वेद के मंत्र का खंड मंडन दूसरे वेद में करता है 

एतरिय ब्राह्मण 14 . 6 
सूर्य उदय और अस्त नही होता हम दौड़ कर मांगे एतरिय पर सायण का भाष्य उपलब्ध है , वो भाष्य का हवाला हर कोई आर्य कुत्ता देता है , बरहाल मुद्दे की बात है पर उसी एतरिय का 7 .1 क्यों कि मानते 

सब पोपलीला है , दयानंद ने कहा है , की ब्राह्मण ग्रंथ में मिलावट हुई है , तो एतरिय 14 . 6 मिलावट Q नही ? 

101% मिलावट है अगर नही है तो हर चीज माननी होगी 

~ इदरीस रिज़वी

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