Friday, 19 June 2020

(III) कृष्ण, रासलीला


【जन्माष्टमी विशेषांक】

" *कृष्ण को समझिए*"

कृष्ण मूलतः एक संस्कृत शब्द है, जो "काला", "अंधेरा" या "गहरा नीला" का समानार्थी है। "अंधकार" शब्द से इसका सम्बन्ध ढलते चंद्रमा के समय को कृष्ण पक्ष कहे जाने में भी स्पष्ट झलकता है।इस नाम का अनुवाद कहीं-कहीं "अति-आकर्षक" के रूप में भी किया गया है।

श्रीमद भागवत पुराण के वर्णन अनुसार कृष्ण जब बाल्यावस्था में थे तब नन्दबाबा के घर आचार्य गर्गाचार्य द्वारा उनका नामकरण संस्कार हुआ था। नाम रखते समय गर्गाचार्यने बताया कि, 'यह पुत्र प्रत्येक युग में अवतार धारण करता है। कभी इसका वर्ण श्वेत, कभी लाल, कभी पीला होता है। पूर्व के प्रत्येक युगों में शरीर धारण करते हुए इसके तीन वर्ण हो चुके हैं। इस बार कृष्णवर्ण का हुआ है, अतः इसका नाम कृष्ण होगा।'वासुदेव का पुत्र होने के कारण उसका अतिरतिक्त नाम वासुदेव भी रखा गया। "कृष्ण" नाम के अतिरिक्त भी कृष्ण भगवान को कई अन्य नामों से जाना जाता रहा है, जो उनकी कई विशेषताओं को दर्शाते हैं। सबसे व्यापक नामों में "मोहन", गोविन्द, माधव, और गोपाल प्रमुख हैं।

(अहसान फिरोज़ाबादी)

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*HINDU DHARAM ki Anusar*

● Sri Krishan, Bhagwan ka Avatar the.
● Sri Krishna ne AAPNI MUNH me BRAHMAND dikhaya tha.
● Sri Krishna ne Draupadi ko KAPDE infinite kar diye the,  JAB *DUSHSASAN* ne DRAUPADI ke KAPDA utare the.
● Sri Krishan *SUDARSHAN CHAKRA* se jise chahe use marte the.

*LEKIN - LEKIN - Yadyapi*

*KURUKSHETRA Yudh* me Sri Krishan ko KAURAV ko  marne ke liye PANDAV ki Madad lena padi.
*Sri Krishna Jhutha Bhagwan the?* 
*aur Kya Sri Krishan vahi Aatankvadi the?* Jiski vajah se MAHABHARAT YUDDH huwa tha.

RAM CHANDRA ji vi BHAGWAN the
LEKIN  *RAWAN  ko HATYA karne ke liye Unko bhi EK BANDAR, HANUMAN se madad leni padi* 

To kya wo bhi Jhuthe Bhagwan The??

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●कृष्ण अवतार●

*कृष्णा* अवतार के तो कहने ही क्या। दुनिया का सबसे बड़ा ढोंग *कृष्ण* को भगवान् प्रचारित करने को बोला जा सकता है। उस *कृष्ण* को भगवान् बना दिया, जो गाँव की *लड़कियों* और *औरतों* को नंगे नहाते हुए देखता था। जिस के नन्द गाँव की हर *औरत* के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे। *कृष्ण* के शारीरिक सम्बन्ध *कुवारी* और *विवाहित* दोनों स्त्रियों के साथ थे। इस विषय पर लगभग सारा साहित्य एक मत है। कुछ उदाहरण यहाँ प्रस्तुत है:

‘ता: वार्यमाणा: पतिभि: पितृभि्भ्रातृभिस्तथा,
कृष्ण गोपांगना रात्रौं रमयंती रतिप्रिया
*[विष्णुपुराण 5/13/59]*

*(अर्थात:-)* वे रतिप्रिय *गोपियाँ* अपने पतियों, पिताओं और भाइयो के रोकने पर भि रात में *कृष्ण* के साथ रमण करती थी. 

*कृष्ण* और *गोपियों* का अनुचित सम्बन्ध था यह बात भागवत में स्पष्ट रूप से मोजूद हैं, ईश्वर अथवा उस के अवतार माने जाने वाले *कृष्ण* का जन सामान्य के समक्ष अपने ही गाँव की *बहु-बेटियों* के साथ सम्बन्ध रखना क्या आदर्श था?

*कृष्ण* ने गोपियों के साथ-साथ ठंडी बालू वाले नदी पुलिन पर प्रवेश कर के रमण किया. वह स्थान कुमुद की चंचल और सुगन्धित वायु आनंददायक बन रहा था. बाहे फैलाना, आलिंगन करना, *गोपियों* के हाथ दबाना, बाल(चोटी) खींचना, *जंघाओं पर हाथ फेरना,* नीवी एवं स्तनों को चुन, *गोपियों के नर्म अंगो नाखुनो से नोचना,* तिरछी निगाह से देखना, हंसीमजाक करना आदि क्रियाओं से गोपियों में कामवासना बढ़ाते हुए कृष्ण ने रमण किया.
*[श्रीमदभागवत महापुराण 10/29/45]*

*कृष्ण* ने रात रात भर जाग कर अपने साथियो सहित अपने से अधिक अवस्था वाली और *माता* जैसे दिखने वाली *गोपियों* को भोगा. *[आनंद रामायण राज्य सर्ग 3/47]*

*कृष्ण* के विषय में जो कुछ आगे पुरानो में लिखा हैं उसे लिखते हुए भी शर्म महसूस होती हैं की गोपियों के साथ उसने क्या-क्या किया इसलिए में निचे अब सिर्फ हवाले लिख रहा हूँ जहा कृष्ण ने गोपियों के यौन क्रियाये की हैं।
*[ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय 74,75,77]*

*कृष्ण* का सम्बन्ध अनेक *नारियों* से रहा हैं *कृष्ण की विवाहिता पत्नियों की संख्या सोलह हज़ार एक सो आठ बताई जाती हैं.* धार्मिक क्षेत्र में *कृष्ण* के साथ *राधा* का नाम ही अधिक प्रचलित हैं. *कृष्ण* की मूर्ति के साथ प्राय: सभी मंदिरों में *राधा* की मूर्ति हैं. लेकिन आखिर ये राधा थी कौन? *ब्रह्मावैवर्त पुराण* राधा कृष्ण की *मामी* बताई गयी हैं. इसी पुराण में *राधा* की उत्पत्ति *कृष्ण* के बाए अंग से बताई गयी है

*कृष्ण* के बायें भाग से एक कन्या उत्पन्न हुई. *गुडवानो* ने उसका नाम *राधा* रखा.’
*[ब्रह्मावैवर्त पुराण, 5/25-26]*

‘उस *राधा* का विवाह *रायाण* नामक वैश्य के साथ कर दिया गया *कृष्ण* की जो माता यशोदा थी *रायाण* उनका सगा भाई था.
*[ब्रह्मावैवर्त पुराण 49/39]*

यदि *राधा* को *कृष्ण* के अंग से उत्पन्न माने तो वह उसकी पुत्री हुई . यदि यशोदा के नाते विचार करें तो वह *कृष्ण की मामी हुई.* दोनों ही दृष्टियो से *राधा* का *कृष्ण* के साथ प्रेम अनुचित था और *कृष्ण* ने अनेको बार *राधा* के साथ सम्भोग किया था *(ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय15)* और यहाँ तक विवाह भी कर लिया था *(ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, 115/86-88)*

इन सभी बातों पर अगर गौर किया जाये तो आप पाठकगण खुद ही समझ सकते है कि *कृष्ण* भगवान् कहलाने का कितना अधिकारी है? *भागवत गीता* के बारे जो कथा प्रचलित है वो भी मात्र झूठ ही है। *भागवत गीता* भी मूल निवासियों को धर्म की गुलामी में फंसाए रखने का एक षड्यंत्र मात्र है। जो एक *आर्य ऋषि व्यास* ने लिखा था जिस में अच्छी बातें सिर्फ इस लिए लिखी गई ताकि मूल निवासी शक ना करे और *ब्राह्मणों* के धर्म जाल में फंसे रहे।

*महाभारत* के नाम पर भी *मूल-निवासियों* को सिर्फ झूठ ही बताया गया है। ना कभी *महाभारत* का युद्ध हुआ और ना ही *गीता* युद्ध में *कृष्ण* ने बोली। यह तो *कृष्ण* को भगवान् को साबित करने का एक *षड्यंत्र* मात्र है।

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भागवत पुराण,स्कन्ध 10,अध्याय 22

एक दिन सब कुमरीयो ने प्रतिदिन कि भाँति यमुनाजी के तट पर जाकर आपने अपने वस्त्र उतार दिये और भगवान श्री कृष्ण के गुण गान करती हुई बड़े आनंद से जल क्रीड़ा करने लगी॥ ७॥परीषित्! भगवान श्री कृष्ण सनकादि योगियों और शंकर आदि योगेश्वरो के भी ईश्वर है़। उनसे गोपियों कि अभिलाषा छिपी ना रही। वे उनका अभिप्राय जानकर अपने शाखा ग्वालबालोके साथ उन कुमरीयो कि साधना सफल करने के लिए यमुनाजी तटपर गये॥ ८॥उन्होने अकेले ही उन गोपियों के सारे वस्त्र उठा लिये और बड़ी फुर्तीसे वे एक कदम्बके वृक्ष पर चड़ गये। साथी ग्वालबाल ठठा-ठठा कर हँसने लगे और स्वयं श्री कृष्ण भी हँसते हुए गोपियों से हसी कि बात कहने लगे-॥९॥ ' अरी कुमारीयो!  तुम यहा आकर इच्छा हो तो अपने अपने वस्त्र ले जाओ। मै तुम लोगों से सच सच कहता हु। हसी बिल्कुल नहीं करता तुम लोग व्रत करते करते दुबली हो गयी हो॥ १०॥ये मेरे शाखा ग्वालबाल जानते है़ कि मैने कभी कोई झूटी बात नहीं कही है़। सुंदरियों! तुम्हारी इच्छा हो तो अलग-अलग आकर अपने-अपने वस्त्र ले लो या सब एक साथ ही आओ। मुझे इसमे कोई आपत्ति नहीं'॥११॥

भगवान कि ये हसी-मसकरी देखकर गोपियों का हृदय प्रेम से सराबोर हो गया। वे तनिक सकूवाकर  एक दूसरी कि ओर देखने और मुस्कुराने लगी।जल से बाहर नहीं निकली॥१२॥जब भगवान ने हसी हसी मे यह बात कही,तब उनके विनोदसे कुमरीयोका चित्त और भी उनकी ओर खींच गया। वे ठंडे पानी मे कंठतक दडूबी हुई थी और उनका शरीर थर-थर कांप रहा था।  उन्होने श्रीकृष्ण से कहा -॥१३॥ प्यारे श्री कृष्ण! तुम ऐसी अनीति मत करो। हम जानते है़ कि तुम नंदबाबा के लाडले लाल हो। हमारे प्यारे हो। सारी ब्रजवासी तुम्हारी सराहना करते रहते है़। देखो हम जाड़े के कारण ठिठूर रही है़। तुम हमे हमारे वस्त्र दे दो॥ १४॥प्यारे श्यामसुंदर! हम तुम्हारी दासी है़। तुम जो कुछ कहोगे, उसे हम करनेको तय्यार है़। तुम तो धर्म का मर्म भलीभाँति जानते हो। हमे कष्ट मत दो। हमारे वस्त्र हमे दे दो;नहीं तो हम जाकर नंदबाबा से कह देंगे॥ १५॥

भगवान श्री कृष्ण ने कहा-कुमरीयो ! तुम्हारी मुस्कान पवित्रता और प्रेम से भरी है़। देखो, जब तुम अपने को मेरी दासी स्वीकार करती हो और मेरी आज्ञा का पालन करना चाहती हो तो यहा आकर अपने-अपने वस्त्र ले लो॥१६॥परीक्षित्! वे कुमरीया ठंड से ठीठूर रही ठी कांप रही थी। भगवान कि ऐसी बात सुनकर वे अपने दोनों हातो से अपने गुप्त अंगो को को छुपाकर यमुनाजी से बाहर निकली। उस समय समय ठंड उन्हे बहोत सता रही थी॥१७॥

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■ *श्री कृष्ण गोपीयो के साथ?* ■ 
*[ श्रीमद्भागवतम् 10.22.16-17  ]*
भगवंतो की सर्वोच्च व्यक्तित्व ( श्री  कृष्ण  ) ने कन्यायों से कहा: यदि आप लड़कियां वास्तव में मेरी नौकरानी हैं, और यदि आप वास्तव में मैं क्या कहता हूं, तो अपनी मासूम मुस्कान के साथ यहां आएं और प्रत्येक लड़की को उसके कपड़े चुनने दें। * यदि आप ऐसा नहीं करते हैं। मैं कहता हूं, मैं उन्हें तुम्हें वापस नहीं दूंगा। और अगर राजा क्रोधित हो जाए, तो वह क्या कर सकता है? *फिर, दर्दनाक ठंड से कंपकंपी, सभी युवा लड़कियों ने पानी से बाहर उठकर, अपने हाथों से अपने जघन क्षेत्र को कवर किया*।


■■*वैदिक बलात्कारी  श्री कृष्ण ने अपनी चचेरी लड़की मैत्रविन्दा को अपहरण  किया और उसकी बलात्कार कीया ??* ■■
*( श्री मद्भागवतम्  १०. ५८ .३१ )*
मेरे प्यारे राजा, भगवान *श्री कृष्ण ने जबरदस्ती , उनकी चाची रूचि देवीकी बेटी राजकुमारी मैत्रविन्दा को,*  प्रतिद्वंद्वी राजाओं की आँखों के सामने से *अपहरण कर के ले गई*।


■■ *श्री कृष्ण ??* ■■
*( देवी भागवतम ४: १७: ४८ )*
क्या हरि श्री कृष्ण चोर नहीं था जब उसने कुमारी  रुक्मिणी को चोरी से अपहरण  किया और जल्दी से अपनी जगह पर भाग गया।


■■ *श्री कृष्ण अपनी मामी (मामा कि पत्नी) के साथ?* ■■
●● *"राधा" श्री कृष्ण की मामी (मामा कि पत्नी) थी?)* ●●

ग्रन्थ = ब्रह्माविवर्त पुराण: “ प्राकृत-खंडम् : हरगौरी संवादे "

*अध्याय 49*

*३६* वराह-कल्प में, राधिका का जन्म गोकुला गाँव में एक वैश्य चरवाहे वृषभानु के परिवार में हुआ था *
*३७*  गर्भावस्था के दौरान उनकी मां कलावती ने केवल हवा को चलाया। जिस समय माँ हवा को जन्म दे रही थी, उसी बीच राधिका उनकी बेटी के रूप में प्रकट हुई। * 
*३८* बारह साल की अवधि समाप्त होने के बाद, उसे RAYANA नाम का एक व्यापारी को बिबाह दिया गया था *
*४१* यह  रयाना कृष्ण की माँ यशोदा  की असली भाई थी *, जो पत्नी राधा की  साथ  वृंदावन के पवित्र जंगल में रहती थी।
*४३* राधा जिनके चरण कमल के समान सपने में भी चरवाहे की दृष्टि से परे थे, वही  राधा  रायाना कि घर मे रहते हुए कृष्ण के साथ लेता करता था
*४६* भरत की भूमि में वृंदावन के पवित्र वन में, कृष्ण ने  राधा की  साथ आनंद लिया। *
*४७* इसके बाद सुदामा के शाप के कारण दोनों एक दूसरे से अलग हो गए थे।

* इसलिए इस अध्याय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राधा कृष्ण से बड़ी थीं और यशोदा के भाई रयाना से पहले ही शादी कर चुकी थीं, कृष्ण के गोकुला में आने से पहले जो राधा को कृष्ण की माथुर AUNT (मामी) के रूप में बनाती है *
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३२ वराह-कल्प में, राधिका का जन्म गोकुला गाँव में एक वैश्य चरवाहे वृषभानु के परिवार में हुआ था ।
३३ गर्भावस्था के दौरान उनकी मां कलावती ने केवल हवा को चलाया। जिस समय माँ हवा को जन्म दे रही थी, उसी बीच राधिका उनकी बेटी के रूप में प्रकट हुई।
३६ बारह साल (बाल विवाह प्रथा) की अवधि समाप्त होने के बाद, उसे RAYANA नाम का एक व्यापारी को विवाह दिया गया था ।
३७ यह रयाना कृष्ण की माँ यशोदा का असली भाई था, जो पत्नी राधा की साथ वृंदावन के पवित्र जंगल में रहती थी । 
३८ राधा जिनके चरण कमल के समान सपने में भी चरवाहे की दृष्टि से परे थे, वही राधा रायाना कि घर मे रहते हुए कृष्ण के साथ लेटा करती थी ।
३९ भरत की भूमि में वृंदावन के पवित्र वन में, कृष्ण ने राधा के साथ आनंद लिया। 
४० इसके बाद सुदामा के श्राप के कारण दोनों एक दूसरे से अलग हो गए थे।

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 *रंगीला कृष्ण* 

दशरत राम यदि ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहलाता हैं तो वासुदेव नंदन कृष्ण ‘लीला पुरुषोत्तम’ अर्थात कृष्ण अपनी अनोखी लीलाओ के कारण जन सामान्य में अधिक लोकप्रिय रहे हैं. संभवत: कृष्ण का बचपन नंदगांव और गोकुल में गोपियों के बीच बीता. कृष्ण औरतो के मामले में शुरू से ही स्वतंत्र विचार के थे. पुराणों के अनुसार उनका मिजाज़ लड़कपन से ही आशिकाना मालूम होता हैं. गोपियों के साथ कृष्ण का यौन सम्बन्ध था इस विषय में लगभग सारा कृष्ण साहित्य एकमत हैं. इन गोपियों में विवाहित और कुमारी दोनों प्रकार की थी वे अपने पतियों, पिताओ और भाइयो के कहने पर भी नहीं रूकती थी: 
*‘ ता: वार्यमाणा: पतिभि: पितृभिभ्रातृभि स्तथा, कृष्ण गोपांगना रात्रौं रमयंती रतिप्रिया :’ -विष्णुपुराण, 5, 13/59.* 
अर्थात वे रतिप्रिय गोपियाँ अपने पतियों, पिताओं और भाइयो के रोकने पर भि रात में कृष्ण के साथ रमण करती थी. 

कृष्ण और गोपियों का अनुचित सम्बन्ध था यह बात भागवत में स्पष्ट रूप से मोजूद हैं, ईश्वर अथवा उस के अवतार माने जाने वाले कृष्ण का जन सामान्य के समक्ष अपने ही गाँव की बहु बेटियों के साथ सम्बन्ध रखना क्या आदर्श था ? 

कृष्ण ने गोपियों के साथ साथ ठंडी बालू वाले नदी पुलिन पर प्रवेश कर के रमण किया. वह स्थान कुमुद की चंचल और सुगन्धित वायु आनंददायक बन रहा था. बाहे फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ दबाना, बाल (चोटी) खींचना, जंघाओं पर हाथ फेरना, नीवी एवं स्तनों को चुन, गोपियों के नर्म अंगो नाखुनो से नोचना, तिर्चि निगाह से देखना, हंसीमजाक करना आदि क्रियाओं से गोपियों में कामवासना बढ़ाते हुए कृष्ण ने रमण किया. *श्रीमदभागवत महापुराण 10/29/||45||46||* 

कृष्ण ने रात रात भर जाग कर अपने साथियो सहित अपने से अधिक अवस्था वाली और माता जैसे दिखने वाली गोपियों को भोगा. – *आनंद रामायण, राज्य सर्ग 3/47* 

कृष्ण के विषय में जो कुछ आगे पुरानो में लिखा हैं उसे लिखते हुए भी शर्म महसूस होती हैं की गोपियों के साथ उसने क्या-क्या किया इसलिए में निचे अब सिर्फ हवाले लिख रहा हूँ जहा कृष्ण ने गोपियों के यौन क्रियाये की हैं- 
 *ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय 28-6/18, 74, 75, 77, 85, 86, 105, 109,110, 134, 70. –
 * ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, 115/86-88* 

कृष्ण का सम्बन्ध अनेक नारियों से रहा हैं कृष्ण की विवाहिता पत्नियों की संख्या सोलह हज़ार एक सो आठ बताई जाती हैं. धार्मिक क्षेत्र में कृष्ण के साथ राधा का नाम ही अधिक प्रचलित हैं. कृष्ण की मूर्ति के साथ प्राय: सभी मंदिरों में राधा की मूर्ति हैं. लेकिन आखिर ये राधा थी कौन?

ब्रह्मावैवर्त पुराण राधा कृष्ण की मामी बताई गयी हैं. इसी पुराण में राधा की उत्पत्ति कृष्ण के बाए अंग से बताई गयी हैं ‘कृष्ण के बायें भाग से एक कन्या उत्पन्न हुई. गुडवानो ने उसका नाम राधा रखा. – *ब्रह्मावैवर्त पुराण, 5/25-26* 

‘उस राधा का विवाह रायाण नामक वैश्य के साथ कर दिया गया कृष्ण की जो माता यशोदा थी रायाण उनका सगा भाई था. – *ब्रह्मावैवर्त पुराण, 49/39,41,49* 

यदि राधा को कृष्ण के अंग से उत्पन्न माने तो वह उसकी पुत्री हुई . यदि यशोदा के नाते विचार करें तो वह कृष्ण की मामी हुई. दोनों ही दृष्टियो से राधा का कृष्ण के साथ प्रेम अनुचित था और कृष्ण ने अनेको बार राधा के साथ सम्भोग किया था *( ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय 15)* और यहाँ तक विवाह भी कर लिया था *( ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, 115/86-88 )* 


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विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 श्लोक 59-60  में लिखा है-
वे गोपियाँ अपने पति, पिता और भाइयों के रोकने पर भी नहीं रूकती थी रोज रात्रि को वे रति “विषय भोग” की इच्छा रखने वाली कृष्ण के साथ रमण “भोग” किया करती थी।  कृष्ण भी अपनी किशोर अवस्था का मान करते हुए रात्रि के समय उनके साथ रमण किया करते थे।

 भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 33 शलोक 17 में लिखा है -
कृष्ण कभी उनका शरीर अपने हाथों से स्पर्श करते थे, कभी प्रेम भरी तिरछी चितवन से उनकी और देखते थे, कभी मस्त हो उनसे खुलकर हास विलास ‘मजाक’ करते थे। जिस प्रकार बालक तन्मय होकर अपनी परछाई से खेलता है वैसे ही मस्त होकर कृष्ण ने उन ब्रज सुंदरियों के साथ रमण, काम क्रीड़ा ‘विषय भोग’ किया।

भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 29 शलोक 45-46  में लिखा है -
कृष्णा ने जमुना के कपूर के सामान चमकीले बालू के तट पर गोपिओं के साथ प्रवेश किया।  वह स्थान जलतरंगों से शीतल व कुमुदिनी की सुगंध से सुवासित था। वहां कृष्ण ने गोपियों के साथ रमण बाहें फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ दबाना , उनकी छोटी पकरना, जांघो पर हाथ फेरना, लहंगे का नारा खींचना, स्तन पकड़ना, मजाक करना नाखूनों से उनके अंगों को नोच नोच कर जख्मी करना, विनोदपूर्ण चितवन से देखना और मुस्कराना तथा इन क्रियाओं के द्वारा नवयोवना गोपिओं को खूब जागृत करके उनके साथ कृष्णा ने रात में रमण (विषय भोग) किया।

भागवत के स्कन्द 10 के अध्याय 29, 33 में वर्णित अश्लीलता का सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं वर्णन नहीं कर रहा हूँ।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 3 श्लोक 59-62 में लिखा है कि गोलोक में कृष्ण की पत्नी राधा ने कृष्ण को पराई औरत के साथ पकड़ लिया तो शाप देकर कहाँ – हे कृष्ण ब्रज के प्यारे , तू मेरे सामने से चला जा तू मुझे क्यों दुःख देता है – हे चंचल , हे अति लम्पट कामचोर मैंने तुझे जान लिया है। तू मेरे घर से चला जा।  तू मनुष्यों की भांति मैथुन करने में लम्पट है, तुझे मनुष्यों की योनी मिले, तू गौलोक से भारत में चला जा।  हे सुशीले, हे शाशिकले, हे पद्मावती, हे माधवों! यह कृष्ण धूर्त है इसे निकल कर बहार करो, इसका यहाँ कोई काम नहीं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 15 में राधा का कृष्ण से रमण का अत्यंत अश्लील वर्णन लिखा है जिसका सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं यहाँ विस्तार से वर्णन नहीं कर रहा हूँ।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 72 में कुब्जा का कृष्ण के साथ सम्भोग भी अत्यंत अश्लील रूप में वर्णित है।

पदम् पुराण उत्तर खंड अध्याय 245 कलकत्ता से प्रकाशित में लिखा है कि रामचंद्र जी दंडक -अरण्य वन में जब पहुचें तो उनके सुंदर स्वरुप को देखकर वहां के निवासी सारे ऋषि मुनि उनसे भोग करने की इच्छा करने लगे।  उन सारे ऋषिओं ने द्वापर के अंत में गोपियों के रूप में जन्म लिया और रामचंद्र जी कृष्ण बने तब उन गोपियों के साथ कृष्ण ने भोग किया।  इससे उन गोपियों की मोक्ष हो गई। वर्ना अन्य प्रकार से उनकी संसार रुपी भवसागर से मुक्ति कभी न होती।


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विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 श्लोक 59-60  में लिखा है-
वे गोपियाँ अपने पति, पिता और भाइयों के रोकने पर भी नहीं रूकती थी रोज रात्रि को वे रति “विषय भोग” की इच्छा रखने वाली कृष्ण के साथ रमण “भोग” किया करती थी।  कृष्ण भी अपनी किशोर अवस्था का मान करते हुए रात्रि के समय उनके साथ रमण किया करते थे।

भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 33 शलोक 17 में लिखा है -
कृष्ण कभी उनका शरीर अपने हाथों से स्पर्श करते थे, कभी प्रेम भरी तिरछी चितवन से उनकी और देखते थे, कभी मस्त हो उनसे खुलकर हास विलास ‘मजाक’ करते थे। जिस प्रकार बालक तन्मय होकर अपनी परछाई से खेलता है वैसे ही मस्त होकर कृष्ण ने उन ब्रज सुंदरियों के साथ रमण, काम क्रीड़ा ‘विषय भोग’ किया।

भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 29 शलोक 45-46  में लिखा है -
कृष्णा ने जमुना के कपूर के सामान चमकीले बालू के तट पर गोपिओं के साथ प्रवेश किया।  वह स्थान जलतरंगों से शीतल व कुमुदिनी की सुगंध से सुवासित था। वहां कृष्ण ने गोपियों के साथ रमण बाहें फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ दबाना , उनकी छोटी पकरना, जांघो पर हाथ फेरना, लहंगे का नारा खींचना, स्तन पकड़ना, मजाक करना नाखूनों से उनके अंगों को नोच नोच कर जख्मी करना, विनोदपूर्ण चितवन से देखना और मुस्कराना तथा इन क्रियाओं के द्वारा नवयोवना गोपिओं को खूब जागृत करके उनके साथ कृष्णा ने रात में रमण (विषय भोग) किया।

ऐसे अभद्र विचार कृष्णा जी महाराज को कलंकित करने के लिए भागवत के रचियता नें स्कन्द 10 के अध्याय 29,33 में वर्णित किये है जिसका सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं वर्णन नहीं कर रहा हूँ।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 3 श्लोक 59-62 में लिखा है कि गोलोक में कृष्ण की पत्नी राधा ने कृष्ण को पराई औरत के साथ पकड़ लिया तो शाप देकर कहाँ – हे कृष्ण ब्रज के प्यारे , तू मेरे सामने से चला जा तू मुझे क्यों दुःख देता है – हे चंचल , हे अति लम्पट कामचोर मैंने तुझे जान लिया है। तू मेरे घर से चला जा।  तू मनुष्यों की भांति मैथुन करने में लम्पट है, तुझे मनुष्यों की योनी मिले, तू गौलोक से भारत में चला जा।  हे सुशीले, हे शाशिकले, हे पद्मावती, हे माधवों! यह कृष्ण धूर्त है इसे निकल कर बहार करो, इसका यहाँ कोई काम नहीं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 15 में राधा का कृष्ण से रमण का अत्यंत अश्लील वर्णन लिखा है जिसका सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं यहाँ विस्तार से वर्णन नहीं कर रहा हूँ।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 72 में कुब्जा का कृष्ण के साथ सम्भोग भी अत्यंत अश्लील रूप में वर्णित है।

राधा का कृष्ण के साथ सम्बन्ध भी भ्रामक है।  राधा कृष्ण के बामांग से पैदा होने के कारण कृष्ण की पुत्री थी अथवा रायण से विवाह होने से कृष्ण की पुत्रवधु थी चूँकि गोलोक में रायण कृष्ण के अंश से पैदा हुआ था इसलिए कृष्ण का पुत्र हुआ जबकि पृथ्वी पर रायण कृष्ण की माता यसोधा का भाई था इसलिए कृष्ण का मामा हुआ जिससे राधा कृष्ण की मामी हुई।

पदम् पुराण उत्तर खंड अध्याय 245 कलकत्ता से प्रकाशित में लिखा है कि रामचंद्र जी दंडक -अरण्य वन में जब पहुचें तो उनके सुंदर स्वरुप को देखकर वहां के निवासी सारे ऋषि मुनि उनसे भोग करने की इच्छा करने लगे।  उन सारे ऋषिओं ने द्वापर के अंत में गोपियों के रूप में जन्म लिया और रामचंद्र जी कृष्ण बने तब उन गोपियों के साथ कृष्ण ने भोग किया।  इससे उन गोपियों की मोक्ष हो गई। वर्ना अन्य प्रकार से उनकी संसार रुपी भवसागर से मुक्ति कभी न होती।

:-डा. विवेक आर्य



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विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 श्लोक 59-60  में लिखा है-

वे गोपियाँ अपने पति, पिता और भाइयों के रोकने पर भी नहीं रूकती थी रोज रात्रि को वे रति “विषय भोग” की इच्छा रखने वाली कृष्ण के साथ रमण “भोग” किया करती थी।  कृष्ण भी अपनी किशोर अवस्था का मान करते हुए रात्रि के समय उनके साथ रमण किया करते थे।

कृष्ण उनके साथ किस प्रकार रमण करते थे पुराणों के रचयिता ने श्री कृष्ण को कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

 भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 33 शलोक 17 में लिखा है -

कृष्ण कभी उनका शरीर अपने हाथों से स्पर्श करते थे, कभी प्रेम भरी तिरछी चितवन से उनकी और देखते थे, कभी मस्त हो उनसे खुलकर हास विलास ‘मजाक’ करते थे। जिस प्रकार बालक तन्मय होकर अपनी परछाई से खेलता है वैसे ही मस्त होकर कृष्ण ने उन ब्रज सुंदरियों के साथ रमण, काम क्रीड़ा ‘विषय भोग’ किया।

भागवत पुराण स्कन्द 10 अध्याय 29 शलोक 45-46  में लिखा है -

कृष्णा ने जमुना के कपूर के सामान चमकीले बालू के तट पर गोपिओं के साथ प्रवेश किया।  वह स्थान जलतरंगों से शीतल व कुमुदिनी की सुगंध से सुवासित था। वहां कृष्ण ने गोपियों के साथ रमण बाहें फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ दबाना , उनकी छोटी पकरना, जांघो पर हाथ फेरना, लहंगे का नारा खींचना, स्तन पकड़ना, मजाक करना नाखूनों से उनके अंगों को नोच नोच कर जख्मी करना, विनोदपूर्ण चितवन से देखना और मुस्कराना तथा इन क्रियाओं के द्वारा नवयोवना गोपिओं को खूब जागृत करके उनके साथ कृष्णा ने रात में रमण (विषय भोग) किया।

ऐसे अभद्र विचार कृष्णा जी महाराज को कलंकित करने के लिए भागवत के रचयिता ने स्कन्द 10 के अध्याय 29,33 में वर्णित किये है जिसका सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं वर्णन नहीं कर रहा हूँ।

राधा और कृष्ण का पुराणों में वर्णन

राधा का नाम कृष्ण के साथ में लिया जाता है।  महाभारत में राधा का वर्णन तक नहीं मिलता।  राधा का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में अत्यंत अशोभनिय वृतांत का वर्णन करते हुए मिलता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 3 श्लोक 59-62 में लिखा है कि गोलोक में कृष्ण की पत्नी राधा ने कृष्ण को पराई औरत के साथ पकड़ लिया तो शाप देकर कहाँ – हे कृष्ण ब्रज के प्यारे , तू मेरे सामने से चला जा तू मुझे क्यों दुःख देता है – हे चंचल , हे अति लम्पट कामचोर मैंने तुझे जान लिया है। तू मेरे घर से चला जा।  तू मनुष्यों की भांति मैथुन करने में लम्पट है, तुझे मनुष्यों की योनी मिले, तू गौलोक से भारत में चला जा।  हे सुशीले, हे शाशिकले, हे पद्मावती, हे माधवों! यह कृष्ण धूर्त है इसे निकल कर बहार करो, इसका यहाँ कोई काम नहीं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 15 में राधा का कृष्ण से रमण का अत्यंत अश्लील वर्णन लिखा है जिसका सामाजिक मर्यादा का पालन करते हुए मैं यहाँ विस्तार से वर्णन नहीं कर रहा हूँ।
ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण जन्म खंड अध्याय 72 में कुब्जा का कृष्ण के साथ सम्भोग भी अत्यंत अश्लील रूप में वर्णित है।
राधा का कृष्ण के साथ सम्बन्ध भी भ्रामक है।  राधा कृष्ण के बामांग से पैदा होने के कारण कृष्ण की पुत्री थी अथवा रायण से विवाह होने से कृष्ण की पुत्रवधु थी चूँकि गोलोक में रायण कृष्ण के अंश से पैदा हुआ था इसलिए कृष्ण का पुत्र हुआ जबकि पृथ्वी पर रायण कृष्ण की माता यसोधा का भाई था इसलिए कृष्ण का मामा हुआ जिससे राधा कृष्ण की मामी हुई।

कृष्ण की गोपिओं कौन थी?

पदम् पुराण उत्तर खंड अध्याय 245 कलकत्ता से प्रकाशित में लिखा है कि रामचंद्र जी दंडक -अरण्य वन में जब पहुचें तो उनके सुंदर स्वरुप को देखकर वहां के निवासी सारे ऋषि मुनि उनसे भोग करने की इच्छा करने लगे।  उन सारे ऋषिओं ने द्वापर के अंत में गोपियों के रूप में जन्म लिया और रामचंद्र जी कृष्ण बने तब उन गोपियों के साथ कृष्ण ने भोग किया।  इससे उन गोपियों की मोक्ष हो गई। वर्ना अन्य प्रकार से उनकी संसार रुपी भवसागर से मुक्ति कभी न होती।

~ आर्य समाज।

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