Friday, 19 June 2020

(4) पुत्री से बलात्कार, बलात्कार।


*अपने बेटी  से जबरदस्ती सम्भोग करने वाले  आर्य-सोमजीओ के वैदिक  प्रजापति 2*■■

*( ऐतरेय ब्राह्मण ६.५.२ )*  
वीर्य के लिए ऐसा है जैसे चुपके से गर्भ में डाल दिया गया । शुक्राणु मिश्रित हो जाते हैं । *जब प्रजापति ने अपनी बेटी के साथ संभोग किया था, तो उसके शुक्राणु  पृथ्वी पर  भी डाला गया था (और इसके साथ उठ गया था।  उत्पादन करने के लिए यह किया गया था।  )


■■*वैदिक प्रजापति  के अपने बेटी से सम्भोग करने  की अधिक प्रमाण  आर्य-सोमजीओ के लिए* ■■

*( पंचविंश ब्राह्मण ८.२.१० )* प्रजापति अपनी ही बेटी  उसा के ऊपर चले  गए। उसका वीर्य उड़ गया। यह (पृथ्वी) पर भी डाला गया था। उन्होंने इसे परिपूर्ण बनाया, [सोच]: "इस [वीर्य] को खराब मत होने दो।" उन्होंने इससे [कुछ] वास्तविक, अर्थात्, जीव बनाया।


■*ताड्य ब्राह्मण (20/14/2)*■

प्रजापतिर्वा इदमासीत्तस्य वाग् द्वितीयासीताइम्मिधुनं समभवत्सा गर्भमादधत्त 
अथार्त-  *प्रजापति अकेला था और सरस्वति दूसरी थी, उन दोनों ने संग(काम:) किया वह गर्भवती हो गई ।*

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■■*"बलात्कारी  "वैदिक ब्रह्मा"  नंगे हाथो पकड़े  गये  अपने बेटी  को  बलात्कार  करते ?"* ■■

*"ब्रम्हा भगवान या बलात्कारी?"* 

*अपनी बेटी से बलात्कार करने वाला जगत रचयिता भगवान ब्रह्मा।*

‘इन्होंने अपनी ही पुत्री सरस्वती के साथ अनुचित संभोग *sex* कर इस जगत की रचना की।हिन्दू धर्म शास्त्रानुसार देवी सरस्वती ब्रह्मा की पुत्री थी । सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है, लेकिन विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं कि स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण से खुद को बचाकर नहीं रख पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे। सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारो दिशाओं में छिपने का प्रयत्न किया लेकिन उनका हर प्रयत्न बेकार साबित हुआ। इसलिए विवश होकर उन्हें अपने पिता के साथ संभोग *sex* करना पड़ा। 

*श्रीमद्भागवत, तृतीय स्कन्ध, अध्याय12 में लिखा है-*
*वाचं दुहितरं तन्वीं स्वयभूर्हरतीं मनः।*
*अकामां चकमे क्षत्रः सकाम इति नः श्रुतम्* ।। 28 ।।
*तमधर्मे कृतमति विलोक्य पितरं सुताः।*
*मरीचि मुख्या मुनयो विश्रंभत प्रत्यबोधयन्*  ।। 29 ।।
अर्थात् : मैत्रेय कहते हैं कि हे क्षता (विदुर) ! हम लोगों ने सुना है कि ब्रह्मा ने अपनी काम रहित मनोहर कन्या सरस्वती की संभोग कामोन्मत होकर की।। 

नोट:- ईस पोस्ट मे कुछ भी गलत नही कहा है.. सारी बाते *श्रीमद्भागवत,स्कन्द ३,अध्याय 12* के अनुसार प्रमाणीत है.. गाली गलोच और ब्रम्हा की वकालत करने से पेहले *श्रीमद्भागवत,स्कन्द ३,अध्याय 12* मे ईसकी जांच करे धन्यवाद....! 

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■■*अपनी  बेटी  से सम्भोग  करने  वाले   बैदिक प्रजापति ?*■■

*1* - अपनी सुंदरी कन्या उषा के शरीर में ब्रह्मा व प्रजापति ने उस वीर्य का सेक किया।जिस समय पिता युवती कन्या के ऊपर रातिकामी हुआ aur दोनो का समागम हुआ । और जिस समय पिता ने अपनी कन्या उषा के साथ संभोग किया.....। *( ऋग्वेद,मंडल 10 ,सुक्त 61,मंत्र 5- 7, सायन भाष्य, अनुवाद रामगोविंद त्रिवेदी वेदांतशास्त्र,)*

*2* - प्रजापति जिसे दयानंद सरस्वती ने वैदिक ईश्वर माना है वो अपनी लड़की उषा पर मोहित हो गया और sex कि इच्छा हुई तो sex भी कर लिया अपनी बेटी से।देवताओं के लिए ये पाप था के वैदिक ईश्वर अपनी बेटी और हमारी बहन के साथ sex करे, इसलिए देवताओ ने रुद्र से कहा के इस पाप के लिए वैदिक ईश्वर को बाँध दो, जब रुद्र ने वैदिक ईश्वर को बींध दिया तो उस वैदिक ईश्वर का आधा वीर्य यानी sperm गिर गया
*(शतपत ब्राह्मण 1/7/4/1 - 3)*

*3* - प्रजापति ने अपनी लड़की देख कर भार्या के रूप में सोचा वो प्रजापति अपनी पुत्री के पास गए।देवताओ ने jab देखा के प्रजापति कैसा बुरा कर्म करता है, ऐसा सोच कर देवताओ ने ऐसा पुरुष को खोजा जो प्रजापति को मार सके।तब सब देवताओ ne रुद्र को उत्पन्न किया जिसके अंदर प्रजापति को मारने का सामर्थ था *(ऐतरेय ब्राह्मण,अध्याय 3 ,खंड 9)*

*4* - स्त्री ने सोचा के कैसे मुझको अपने शरीर से उत्पन कर पुत्री रूप मुझसे संभोग करता है, ऐसा सोच कर वो छिपने के लिए गाय बन गईऔर पिता बैल बन कर संभोग किया जिससे गाय पैदा हुई।इसी तरह कन्या अलग अलग रूप में छिपती रही और पिता उसके साथ उन्ही रूप में संभोग करता रहा और अलग अलग प्राणियों को जन्म देता रहा *(बृहदारण्यक उपनिषद, अध्याय 1, ब्रह्मण 4, श्लोक4)*

*5* - ब्रह्मा की कन्या सरस्वती बड़ी सुंदर थी, उसे देख कर ब्रह्मा काममोहित हो गए।उनका ऐसा अधर्म देख कर उनके पुत्र ने समझाया के आप अपनी पुत्री से संभोग करने का पाप कैसे कर सकते है *(श्रीमदभगवद महापुराण, स्कन्द 3 ,अध्याय 12, श्लोक 28 - 31)*

*6* - ब्रह्मा ने अपने शरीर से अपनी पुत्री को उत्पन्न किया और अपनी पुत्री की सुंदरता को देख कर बार बार देखने लगे और तारीफ करने लगे।ब्रह्मा को अपनी पुत्री की सुंदरता के सिवा कुछ नही दिखता था।वो कामदेव से मोहित हो गए थे।तब ब्रह्मा ne अपने सारे पुत्रो को प्रजाओं की रचना करने भेज दिया और अपनी पुत्री से संभोग किया और उस संभोग से उनका पुत्र मनु पैदा हुआ *(मत्स्य पुराण, अध्याय 3, श्लोक32- 45)*

पुराण भी हिन्दू धर्म कि पुस्तक है, इसे बृहदारण्यक उपनिषद 2/4/10 के अनुसार हिन्दू धर्म की पुस्तक में शामिल है। दूसरी बात मैंने इस बात को ऋग्वेद, शतपत ब्राह्मण, ऐतरेय ब्राह्मण, बृहदारण्यक उपनिषद से सिद्ध किया है, इसलिए पुराण का बहाना नही चलेगा। रामगोविंद का अनुवाद क्यों नही चलेगा। रामगोविंद ने सायन भाष्य का अनुवाद किया है, न के अपने तरफ से कुछ लिखा है।सायन का भाष्य सबसे पुराना है और सनातन धर्म के मुताबिक भी और दयानंद का वेद भाष्य प्राचीन सनातन के विरुद्ध है (देखो वेद कथंड, गीता प्रेस). और आर्य समाजी के वेद रत्न सत्यव्रत राजेश ने भी इस मंत्र के अश्लीलता को समस्या माना और दयानंद का खूब तारीफ किया के उन्होंने ब्राह्मण आदि ग्रंथों को लात मार कर आप अपना नया अनुवाद किया. ईश्वर निराकार है तो वो संभोग कैसे करेगा। आर्य का ईश्वर सिर्फ नाम का निराकार है, वो साकार है।

देखो:
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=287598732032732&id=157095318416408&fs=5&focus_composer=0

आर्य - प्रजापति सूर्य को भी कहा गया है और उसका किरण उसकी बेटी है औऱ जंहा किरण गिरे उसे सूर्य का स्पर्म माना जायेगा
इंसान - प्रजापति ईश्वर को भी कहा गया है, देखो सत्यार्थ प्रकाश, प्रथम सममुलास, वैदिक कोष page 312।  दूसरी बात जब किरण उसका बेटी है तो बेटा कौन हुआ, जो कहता है प्रजापति ने हमारे बहन के साथ पाप किया। तीसरी बात सूर्य का किरण गिरना कौन सा पाप हो गया, जिसे ब्राह्मण ग्रंथो में कहा गया है। चौथी बात ये रुद्र ने कैसे प्रजापति को बींध दिया और कैसे प्रजापति का आधा स्पर्म गिर गया। ब्राह्मण ग्रंथ में रुद्र प्रजापति से भी ज़्यादा शक्तिशाली सिद्ध होता है, तो ये रुद्र है कौन। पाचवी बात देवता इतना क्रोधित क

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Prajapati(bramha) ne apni hi beti se sambhog kiya tha,

Rigved(shayan bhashya):-mandal 10:sukt 61 :mantr 5-7

5:-
प्रथिष्ट यस्य वीरकर्ममिष्णदनुष्ठितं नु नर्यो अपौहत् ।
पुनस्तदा वृहति यत्कनाया दुहितुरा अनुभृतमनर्वा ॥
प्रजापति का पुत्र उत्पन्न करने मे समर्थ वीर्य सर्वोत्तम है़.प्रजापति ने अपने उस मानवहितकारी वीर्य का त्याग किया,जिसे उन्होने अपनी सुंदर उषा के शरीर मे सिंचित किया था।(ऋ:-10:61:5)

6:-
मध्या यत्कर्त्वमभवदभीके कामं कृण्वाने पितरि युवत्याम् । मनानग्रेतो जहतुर्वियन्ता सानौ निषिक्तं सुकृतस्य योनौ ॥
जिस समय पिता ने अपनी युवती कन्या के साथ यथेच्छा कर्म किया, उस समय उनके संभोग कर्म के समीप ही थोड़ा वीर्य गिरा.परस्पर अभिगमन करते हुए उन दोनों ने वह वीर्य यज्ञ के ऊंचे स्थान योनी मे छोड़ा था।(ऋ:-10:61:6)

7:-
पिता यत्स्वां दुहितरमधिष्कन्क्ष्मया रेत: संजग्मानो नि षिञ्चत् । स्वाध्योऽजनयन्ब्रह्म देवा वास्तोष्पतिं व्रतपां निरतक्षन् ॥
जिस समय पिता ने अपनी पुत्री के साथ संभोग किया उस समय धरती से मिलकर वीर्य त्याग किया.शोभन कर्म वाले देवों ने उसी वीर्य से व्रतरक्षक देव वास्तोष्पति का उत्पादन किया। (ऋ:-10:61:7)

Prajapati bramha ka hi naam hei krke satyarth prakash ke pratham samullas me likha hua hei. Note:- yahi translation Ram Govind trivedi ji ne bhi kiya hei. Aur ab yahi baat bramhano ke shatpath bramhan me bhi hei jo ki yajurved ka hi bramhan granth hei.

Shatpath bramhan:-khand 1,adhyay 7,bramhan 4.
Isme bhi yahi likha hei ki prajapati ne apni putri ke sath prasang kiya.

Yahi same cheez aitareybrahaman granth me bhi hei Jo rigved ka bramhan granth hei.
Aeteryabramhan:-adhyay 3,khand 9 
Isme aata hei jo ki shatpathbramhan granth me likha hei.

तत् शिश्नेन अजिघृक्षत्। तत् शिश्नेन ग्रहीतुम् न अशक्नोत्। सः यत् ह शिश्नेन अग्रहैस्यत्। अन्नं विसृज्य ह एव अत्रप्स्यत् ॥
'उसने' लिंग (शिश्न) के द्वारा उसे पकड़ना चाहा, किन्तु वह लिंग से उसे नहीं पकड़ सका। यदि 'वह' उसे लिंग से पकड़ पाता तो वह भोजन के विसर्जन मात्र से तृप्त हो जाता।

एकादशोपनिषाद :-iske andar bhi hei aur  brahdharniyak upnishad ke adhyaya 1 bramhan 4 slok 4 me likha hei ki स्त्री ने देखा उसको विचारा कैसे मुझको अपने शरीर से उत्पन्न कर पुत्री रूप मुझसे सनयुक्त होता है और आतीक्रम करता है. Isi me likha hei ki putri jaise cow banti thi to prajapati bull banta tha to isse gay aur bail paida hue aise hi krke purti saare stri rup jaanvar ke leti rahi aur pati nar rup jaanvar leta raha aur putri se hr rup me sambhog krta raha aise krke inhone sare jaanvar rach diye.


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ब्रह्मा ने अपनी बेटी सरस्वती का किया बलात्कार।

हिन्दूओं के चार मुँह वाले भगवान ब्रा-माँ (ब्रह्मा) ने अपनी पूरी कामशक्ति अपनी बेटी सरस्वती पर ही दिखा डाली. इसका उल्लेख हिन्दुओं की आकाशीय पुस्तक 'ऋग्वेद' में भी मौजूद है:

"प्रथिष्ट यस्य वीरकर्ममिष्णदनुष्ठितं नु नर्यो अपौहत् ।
पुनस्तदा वृहति यत्कनाया दुहितुरा अनुभृतमनर्वा ॥" 

"मध्या यत्कर्त्वमभवदभीके कामं कृण्वाने पितरि युवत्याम् ।
मनानग्रेतो जहतुर्वियन्ता सानौ निषिक्तं सुकृतस्य योनौ ॥"

"पिता यत्स्वां दुहितरमधिष्कन्क्ष्मया रेत: संजग्मानो नि षिञ्चत् ।
स्वाध्योऽजनयन्ब्रह्म देवा वास्तोष्पतिं व्रतपां निरतक्षन् ॥"

"जिस प्रजापति का इच्छाशक्ति युक्त #वीर्य विख्यात है. जिससे वीर पुरुष ही उत्पन्न होते हैं. प्रजापति संतति निर्माण के लिए, उसका शक किया. उस (वीर्य को) मानवों के हित के लिए ही त्यागा था. पुनः वो उसे धारण करता है. जो सर्वश्रेष्ठ प्रजापति अपनी #सुन्दर_कन्या_उषा के #गर्भ में रखता है."

"जिस समय युवती कन्या उषा में #कामना करते हुए, पिता, उन दोनों का आकाश में निकट जो #संगमन हुआ, उस समय अल्प #वीर्य का सेक हुआ. परस्पर संगमन करते हुए, प्रजापति ने यज्ञ के आधारस्वरुप एक ऊंचे स्थान में उ8सका सिंचन किया, इससे #रुद्र उत्पन्न हुआ."

"जिस समय #पिता_प्रजापति का अपनी #कन्या_उषा के साथ संगत हुआ, उस समय पृथ्वी के साथ मिलकर उसने #वीर्य का सिंचन किया, तभी उत्तम कार्य करने वाले ब्रह्म को उत्पन्न किया. सब कार्यों के रक्षक वास्तोष्पति यज्ञ के पालक का निर्माण किया."

ऋग्वेद, मंडल - 10, सूक्त - 61, मंत्र - 5,6,7


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सनातन_बलात्कार

ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या से बलात्कार किया ...इंद्रदेव ने..फिर भी पूजनीय....क्यूँ???

राजा पाण्डु ने माधुरी से बलात्कार किया...उसका दहन नहीं...कोई सजा नहीं....क्यों????

ऋषि_पराशार ने केवट की पुत्री सत्यवती से बलात्कार किया....उसका बहिष्कार क्यों नहीं....

बृहस्पति की पत्नी तारा का चंद्र ने अपहरण कर बलात्कार किया...(देखा जाए तो बलात्कारी को देख कर करवाचौथ की पूजा की जाती है..जाने किस मंशा से??)

ब्रह्मा ने अपनी पुत्री वाच से जबरन सहवाह किया और पुत्री सरस्वती से जबरन विवाह कर हमेशा के लिए बलात्कार का अधिकार पा लिया....(ऐसा आराद्धय मुँह के जनों का ही हो सकता है...

नरक के राजा की रानियों से कृष्ण का विवाह और मामा_अनय की पत्नी से शारीरिक संबंध......फिर भी पूजनीय है पता नहीं क्यूँ(आज अगर कोई किसी के कपड़े चुरा कर भागे तो उसके शरीर पर कपड़े नहीं बचेंगे)

भीष्म ने अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका का अपहरण किया ताकि नियोग द्वारा बच्चा पैदा किया जा सके....(ये भी बलात्कार का ही रूप है)...फिर काहे के पितामह????

राम के पूर्वज राजा_दण्ड ने शुक्राचार की पुत्री अरजा के साथ बलात्कार किया...(यानी राम एक बलात्कारी के वंशज थे)

वायु देवता ने महर्षि कुशनाभ की कन्याओं से बलात्कार की कोशिश की....

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