【भारतीय धर्म ग्रंथों में बहुपत्नीत्व (एक से अधिक पत्नी) 】-१
अपने किए गए वादे के अनुसार बहु पत्नी दो पर अपने विचार रखने के लिए अपने लेख प्रस्तुत कर रहा हूं इन लेखों में किसी भी महापुरुष एवं देवी देवता आदि के ऊपर ना तो लांछन है और ना ही कोई आपत्ति एवं आरोप दृष्टिगत है यहां लेख द्वारा बहुतपत्नीत्व के प्रमाणों को इसलिए रखा जा रहा है कि तीन तलाक पर हंगामा करने वाले और जय श्रीराम के नारे लगाने वाले जो आप बहु पत्नीतव विरोधी बिल लाने की तैयारी कर रहे हैं वह भारतीय धर्म ग्रंथों को जो उनके धर्म ग्रंथ हैं एक बार दृष्टि डालें ताकि वह सत्यता से अवगत हो सकें कहीं ऐसा ना हो कि इस बार उनको मुंह की खानी पड़े खैर हमारा मकसद सत्यता से अवगत कराना है किसी की आस्था पर ठेस पहुंचाना नहीं।
<◆श्री रामजी की सीताजी के अलावा अन्य पत्नियां ◆>
क्या श्री राम की सीता माता के अलावा भी कोई पत्नी थी इस पर अपना मंतव्य रखने से पूर्व श्री राम के व्यक्तित्व पर सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला ग्रंथ रामायण का प्रमाण बाद में रखेंगे। यह जानकर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि श्री राम का जिक्र (उल्लेख) केवल रामायण राम चरित्र मानस में ही नहीं अपितु जैन धर्म में भी पाया जाता है जैन धर्म की महान विभूतियों में से श्री रामचंद्र जी एवं लक्ष्मण जी जिनको जैन धर्म में बहुत ही सम्मान एवं प्रतिष्ठा का स्थान प्राप्त है जैन धर्म के आठवें बलभद्र एवं नारायण माने जाते हैं इनके भी जैन धर्म में पौराणिक वृत्तांत एवं कथाओं के अनुसार कई पत्नियां होने के प्रमाण मिलते हैं। जैन धर्म के पुष्पदंत विरचित महापुराण में श्री रामचंद्र के सीता के अलावा सात और पत्नियां एवं लक्ष्मण जी की अन्य 16 पत्नियों का वर्णन मिलता है
(देखें- विरचित महा० पु० 70/13/9-10)
इस के अतिरिक्त आचार्य गुणभद्र विरचित उत्तरपुराण के अनुसार श्री रामचंद्र जी की 8000 पत्नियों एवं लक्ष्मण जी की 16000 अन्य पत्नियों का भी वृतांत मिलता है जो इस प्रकार है
पृथ्वी सुंदरी मुख्य: केशवस्य मनोरमा:|
द्धिगुणाष्ट शस्त्राणि देव्य सत्याअ भवन्निष्कश्रय||
सीताघष्ट..........................प्रकानवल्लभा:|
द्धिगुणाष्ट.... ............................महीभुज||
(देखें- उत्तर पुराण , 68/666-667 )
विरचित पदम पुराण में श्री रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी की कुछ प्रमुख पत्नियों के नाम भी दिए हैं जैसे सीता जी के अतिरिक्त प्रभावती ,रति निभा , श्रीदामा यह श्री राम की पत्नियां थी उसके अतिरिक्त लक्ष्मण जी की पत्नियों के भी नाम दिए गए हैं जैसे विशल्या , रूपवती वर्णमाला कल्याणमाला, रतिमाला, भगवती , मनोरमा आदि
( देखें - रवि० वि०पदम् पुराण ,94/24-25 )
●(रामायण का प्रमाण)●
श्री राम के एक से अधिक पत्नियां के बारे में बाल्मीकि रामायण अन्य पत्नियों के नाम तो नहीं बताती परंतु श्री राम के अन्य पत्नियां होने का इशारा ज़रूर करती है उदाहरण के लिए उत्तरकांड का वह वृतांत देखें जिसमें महाऋषि वाल्मीकि सीता को पटरानी कहकर पुकारते हैं पटरानी वह शब्द है और उस स्त्री या पत्नी के लिए बोला जाता है जिसके पति की अन्य पत्नियां भी हों अर्थात मुख्य पत्नी पटरानी होती है जब श्रीराम के अन्य पत्नियां रही होंगी तभी तो बाल्मीकि ने सीता को पटरानी कहा जब सीता ने बाल्मीकि के आश्रम में प्रवेश किया तो बाल्मीकि ने सीता का स्वागत करते हुए कहा कि पतिव्रते तुम राजा दशरथ की पुत्रवधू महाराजा श्री राम की प्यारी पटरानी और मिथिला के राजा जनक की पुत्री हो ,
"तुम्हारा स्वागत है" उत्तरकांड मैं इस वृत्तांत को पढ़ा जा सकता है।
(देखें - उत्तर कांड , 49/ 11)
【भारतीय धर्म ग्रंथों में बहु पत्नीत्व (एक से अधिक पत्नी )】-२
[श्री कृष्ण कि 16 हजार से अधिक पत्नियां]
श्री कृष्ण जी महाराज जो भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार माने जाते हैं उनके 16,000 से अधिक पत्नियों का उल्लेख भारतीय धर्म ग्रंथों में मिलता है भगवत महापुराण हरिवंश पुराण में इसके प्रमाण देखे जा सकते हैं
वृत्तांत इस प्रकार है कि भोमासुर नामक एक विशाल पुरुष था जिसे पृथ्वी का पुत्र कहा गया है वह इतना शक्तिशाली था कि उसने कई देवताओं को पराजित कर दिया था जब देवता इंद्र को भी उससे खतरा होने लगा तो उसने श्री कृष्ण से इसकी शिकायत की श्री कृष्ण ने राजधानी प्रागज्योतिषपुर जाकर उससे घोर युद्ध किया और युद्ध करके उसे मार डाला भोमासुर को मारने के बाद श्री कृष्ण भौमासुर द्वारा बंदी 16000 राज कन्याओं को आजाद कराया वह 16000 कन्याएं श्री कृष्ण जी का रूप यौवन देख कर उनके रूप यौवन पर मोहित हो गयीं देखें
(भागवत महा पुराण , 10/59/33 और
" तं प्रतिष्टं स्तरीयो वीक्ष्य नरवीरां विमोहिता:।
मनसा वविव्रअ भीस्टं पतिं दैवो पसादितम् ।।
(भगवत महापुराण ,उ० १०/५९/३४)
सभी राजकन्या उन पर मोहित हो गई थी भगवान श्री कृष्ण इंद्रपुरी जाकर भौमासुर द्वारा छीने गए वरुण कुंडल इंद्र को वापस करते हैं और द्वारकापुरी पहुंचकर एक ही समय में उन 16000 राज कन्याओं से विवाह करते हैं वृतांत इस प्रकार हैं
अथो महूरत मुहूर्त एकस्मिननानागारेषु ता: स्त्रिय: ।
यथोपयेमे भगवांस्तावद्र्धरोअव्यय: ।।
अर्थात "तब भगवान कृष्ण ने भिन्न-भिन्न भवनों में जाकर अलग-अलग रूप धारण करके उन सब राज्य कन्याओं के साथ एक ही महूरत में विधिवत विवाह किया"
इसी प्रकार भगवत महापुराण में श्री कृष्ण जी की 16508 पत्नियां एवं हरिवंश पुराण में 16008 पत्नियां जिनमें 8 पटरानीया शामिल हैं का जिक्र मिलता है देखें हरिवंश पुराण 2/60/41-44
उन पत्नियों के नाम भी दिए गए हैं जिनको यहां लिखने की ज़रूरत नहीं।
इसी प्रकार ब्रह्म पुराण में भी श्री कृष्ण की पत्नियों की संख्या 16, 1000 बताई गई और जैन धर्म के उत्तरायण में भी 16008 पटरानियों सहित जिक्र है जिसमें रुकमणी, सत्य भागा , जाम्बवती , सुसीमा ,लक्ष्मणा , गांधारी, गौरी , पद्मावती, पटरानियों का उल्लेख मिलता है
(उत्तर पुराण ,71/126-128 )
इसी प्रकार श्री कृष्ण जी के पिता की 14 पत्नियां
(हरि० पुराण1/35/1) और ससुर के सत्राजित की 10 पत्नियां होने का उल्लेख मिलता है ।
" सत्राजितो दश त्ववसन् भार्यास्तासां शतं सुता:। "
(हरि०पुराण 1/38/3)
सत्राजित की 10 भार्या ( पत्नियां ) थी उनसे 100 पुत्र उत्पन्न हुए।
[श्री कृष्ण के बहनोई अर्जुन की पत्नियों की संख्या]
श्री कृष्ण के बहनोई और महाभारत के मुख्य पात्र अर्जुन की भी कई पत्नियां थी जिसमें चित्रांगदा उलूपी एवं सुभद्रा प्रमुख पत्नियां थी जिनमें में से उलूपी कोरव्य नामक नागराज की पुत्री थी और अर्जुन को स्नान करते हुए थे उनके रूप यौवन पर मोहित हो गई थी और अर्जुन को नहाते में अंदर खींच लिया था दूसरी ओर सुभद्रा श्री कृष्ण की बहन थी जिसको देखते ही अर्जुन उसके रूपियो वन पर मोहित हो गए थे और श्री कृष्णा खुद ही अर्जुन से अपनी बहन का अपहरण कर विवाह करने का आग्रह किया था विस्तार के लिए देखें
(महाभारत - 1/218/14-15, 1/218/16-23) यहां केवल एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूं।
स त्वमार्जुन कल्याणी प्रसहय भगिनीं मम।
हर सांवरे हयस्य को वै वेद चिकीर्षतम् ।।
अर्थात हे अर्जुन मेरी राय तो यह है कि तुम मेरी कल्याणमय बहन को बलपूर्वक हर ले जाओ कौन जाने के स्वयंवर में उसकी क्या चेष्टा होगी वह किसे वरण करना चाहेगी। "
(महाभारत , १/२१८/23 )
【 भारतीय धर्म ग्रंथों में बहुपत्नीत्व】-३
◆महाभारत में बहुपत्नीत्व के प्रमाण◆
जैसे कि बताया जा चुका है कि यह लेख जिसकी श्रंखला बदस्तूर निरंतर प्रस्तुत की जा रही है इसका उद्देश्य किसी भी धर्म समुदाय विशेष को आहत करना नहीं अपितु सत्यता से अवगत कराना है और जो सरकार बहुपत्नीत्व पर बिल लाने की बात कर रही है उसको यह बताना मकसद है कि जिस राष्ट्र की कल्पना आप पेश कर रहे हैं वह खुद आप ही के धर्म ग्रंथों में वर्णित है अर्थात आप अपने धर्म ग्रंथों के विरुद्ध बिल ला रहे हैं जो की हिंदू राष्ट्र की कल्पना के बिल्कुल विपरीत है हो सकता है कि आने वाले वक्त में यह लेख किसी काम आ सकें धन्यवाद अब आगे.....
पुराणों सहित महाभारत में भी विख्यात राजा जो के धर्म पर चलने वाला था शशाबिंदु राजा का वृत्तांत आया है जोके चित्ररथ के पुत्र थे उन्होंने 1 लाख स्त्रियों से शादी की थी जिनके गर्व से 10 लाख पुत्र उत्पन्न हुए वह सभी राजकुमार स्वर्णमय कवच धारण करने वाले और उत्तम धुरंधर थे
देखें .....(महाभारत, 12/29/105-106)
एक और अन्य स्थान पर इस तरह उनका वर्णन मिलता है
" शशबिन्दु च राजानं मृत्यं सृजजय शुश्रुम।
ईजे स विविधैर्यज्ञ: श्रीमान सत्य पराक्रम:।।
तस्से भार्यासहस्त्रण शतमासीन महात्मन: ।
एकैकस्यां च भार्यायां सहस्रं तनयाअ भवन् ।।"
"अर्थात स्रंजय मेरे सुनने में आया है कि राजा शशा बिंदु की भी मृत्यु हो गई थी उन सत्य पराक्रमी श्रीमान नरेश ने नाना प्रकार के यज्ञों का अनुष्ठान किया था महामना शशा बिंदु के 100000 स्त्रियां थी और प्रत्येक स्त्री के गर्भ से एक एक हजार पुत्र पैदा हुए"
इसके अतिरिक्त राधा शशा बिंदु ने अपने 1-1 पुत्र के साथ 100 - 100 कन्याओं का विवाह किया था। देखें है
( महाभारत, १२/२९/१०७)
अतः महाभारत जय श्री महान पुस्तक जिसके बारे में पुराणों में कहा गया है कि तराजू के एक पलड़े में चारों वेद रखे गए और दूसरे पलड़े में महाभारत को रखा गया तो महाभारत वाला पलड़ा झुक गया महाभारत को पांचवा वेद कहा जाने लगा ऊपर दिए गए वृतांत मैं जो उल्लेख मिलता है बहु पत्नी का विरोध करने वाले हमारे सरकारी भगवाधारी ध्यानपूर्वक पढ़ें।
【पांडवों के दादा श्री विचित्र वीर्य के दो पत्नियां थीं 】
इसी तरह महाभारत के मुख्य पात्रों में विचित्रवीर्य का नाम भी प्रमुख है विचित्र वीर धृतराष्ट्र एवं पांडु के क्षेत्रक पिता और शांतनु एवं सत्यवती के छोटे पुत्र थे यानी पांडवों के केवल नाम के दादा श्री इनके भी दो पत्नियां थी इनकी दोनों पत्नियां सगी बहनें और काशीराज की पुत्रियां थी यह भीष्म पितामह के द्वारा स्वयंवर से अपहरण करके लाई गई थी महाभारत बताती है कि काशीराज की 3 कन्याएं थी जो अप्सराओं के समान सुंदर थी इन तीनों कन्याओं को भीष्म पितामह स्वयंवर सभा से अपहरण करके उठा लाए थे परंतु इन तीनों में से एक बहन जिसका नाम अंबा था उसको भीष्म पिता ने वापस जाने की इजाजत इसलिए दे दी क्योंकि उसने यह कहा था कि वह किसी और(राजा शाल्व) को प्रेम करती है और उनका यह संबंध पिछले जन्मों से चलता आ रहा है और वह स्वयंवर में उसी के गले में वरमाला डालती खैर भीष्म ने इन दोनों कन्याओं के साथ विचित्रवीर्य का विवाह कर दिया वरना विचित्रवीर्य की तीन पत्नियां होती विचित्र वीर इन दोनों खूबसूरत कन्याओं को पाकर काम भावना में इतने अंधे हो गए के 7 वर्षों तक विचित्रवीर्य लगातार उन से शारीरिक संबंध बनाए रखें जिसकी वजह से विचित्रवीर्य को तपेदिक जिसे Tuberculosis अर्थात टी बी कहते हैं हो गया था बाद में विचित्र वीर की माता सत्यवती ने महरिशी कृष्ण द्वैपायन व्यास जी से नियोग करा कर 2 पुत्र धृतराष्ट्र और पांडू पैदा करवाए !
विस्तृत जानकारी के लिए देखें।
(महाभारत , 1/ 101 / 3, 1/ 102 /5-57 , 1/ 102 63- 64 ) और ( 1/102 /61-62)
[पांडवों के पिता पांडू की पत्नियां की संख्या]
पांडवों के पिता पांडू की भी दो ही पत्नियां थी जिसमें एक का नाम कुंती और दूसरी का नाम माद्री था।
( देखें महाभारत ,आदि पर्व, 111-112)
[ पांडू के बड़े भाई धृतराष्ट्र के पत्नियों की संख्या]
पांडू के बड़े भाई दृष्ट राष्ट्र की 12 पत्नियां थी जिनसे एक से एक पुत्र और एक कन्या उत्पन्न हुई इनकी 11 पत्नियां क्षत्रिय जाति की थी और एक वैश्य जाति की थी।
देखें ( महाभारत , १/८/२१-२५ और १/१०/१०-२० )
नोट:- जिन श्रीमान को श्लोक दरकार हो तो श्लोक भी भेजे जा सकते हैं परंतु लेख ज्यादा लंबा ना हो जाए इसलिए केवल प्रमाण प्रस्तुत किए जा रहे हैं कि यह कहां पर प्रमाण मिलेगा!
【भारतीय धर्म ग्रंथों में बहुपत्नीत्व】-४
इससे पहले लिखे गए तीनों लेखों में जो बातें सामने आई उससे पता चलता है कि भारतीय धर्म ग्रंथों के महापुरुष जिन्हें हिंदू समाज एवं अन्य समाज पूजनीय समझता है उनकी अनेकों पत्नियां हुआ करती थीं ।
वह बहुविवाह के विरोधी नहीं थे अतः अधिकतर लोगों की पत्नियों की तादाद 1 से ज्यादा मिलती है इसलिए यदि सरकार तलाक बिल के बाद बहु विवाह का विरोध करती है और बहु विवाह के विरुद्ध बिल लेकर आती है तो यह भारतीय धर्म ग्रंथों के विरुद्ध तो होगा ही साथ ही पूजनीय समझे जाने वाले महापुरुषों का भी अपमान होगा इससे पूर्व श्री राम एवं महाभारत के कुछ वृत्तांतो का उदाहरण प्रस्तुत किया गया था आज रामायण के कुछ अन्य पात्रों के प्रमाण प्रस्तुत किए जाएंगे
अब आगे.........
■ रामायण में बहुपत्नीत्व के प्रमाण ■
◆ भगवान श्री राम के पिता राजा दशरथ की पत्नियों की संख्या ◆
इच्छाकुवंशी राजा अज के पुत्र एवं श्री रामचंद्र जी के पिता महाराजा दशरथ की कई पत्नियों का उल्लेख अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है जिनमें प्रमुख तीन पत्नियां अधिक प्रसिद्धि हुईं कौशल्या , सुमित्रा एवं कैकई अधिकतर हमारे हिंदू भाई जो स्वंय रामायण का पाठ कम ही करते हैं उन्हें केवल नाटकों द्वारा कौशल्या सुमित्रा एवं कैकई का ही ज्ञान है और यह समझते हैं कि रामायण केवल दो ही हैं एक बाल्मीकि रामायण और दूसरी राम चरित्र मानस खैर यह हमारा विषय नहीं है आइए देखते हैं कि राजा दशरथ की कितनी पत्नियां थी ।
"भुईआ माधवदास" की उड़िया रामायण में महाराजा दशरथ की 21 पटरानियों का उल्लेख मिलता है इनमें से यह 3 का जिक्र ऊपर आ चुका है जोकि सर्वश्रेष्ठमानी गयी हैं।
देखें (राम कथा पृष्ठ-२२३ )
इसके अतिरिक्त वाल्मीकि रामायण बताती है कि महाराजा दशरथ की इससे भी अधिक पत्नियां थी जो क्षत्रिय जाति , वैश्य जाति एवं शूद्र जाति से संबंधित थी जिनकी संख्या 350 के लगभग थी जिसका वर्णन कई स्थानों पर हुआ है एक स्थान पर जहां श्री राम वनवास के लिए जाते हैं तब वह अपनी माताओं से विदाई लेते समय जिन भावनाओं में बहते हैं उसका वर्णन वाल्मीकि रामायण में इस प्रकार है
" एता वदभिनितार्थमुक्तवासजननींवच:।
त्रय:शतशतर्धा हिददर्शावेक्ष्यमातर:।।"
अर्थात" श्री राम ने इस प्रकार अपनी माता से समायोजित बात कहकर अपनी अन्य 350 माताओं की ओर देखा राम को वह भी कौशल्या के समान दुखी मालूम हुई" देखें
(वाल्मीकि रामायण , 2/39/36)
श्री रामचंद्र जी के पिता दशरथ की पत्नियों की संख्या के बारे में हिंदू धर्म के विद्वान एवं लेखक श्री पीएच गुप्ता ने अपनी किताब रामायण एक नया दृष्टिकोण में श्री राम की माताओं की संख्या 350 ही बताई है।
◆ रामायण के प्रमुख पात्र ब्रह्मदत्त की पत्नियों की संख्या ◆
ब्रह्मदत्त भी रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं यह महर्षि चूली के पुत्र थे महा ऋषि चूली भी रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं जिनके के बारे में बाद में बताया जाएगा। राजा ब्रह्मदत्त की 100 पत्नियों का वर्णन वाल्मीक रामायण में मिलता है वृत्तांत इस प्रकार है कि राजा कुशनाभ की 100 कन्याएं थी जब वह एक बाग में टहल रही थीं तब उन कन्याओं के रूप यौवन को देखकर पवन देवता काम मोहित हो गए और उन्होंने उन सौ कन्याओं के साथ संसर्ग करने की इच्छा व्यक्त की जिसे उन 100 कन्याओं ने यह कहकर ठुकरा दिया
" पिता हिप्रभुरस्माकं दैवतं परमंचस।
यसयानोदास्यति पिता सनोभर्ता भविष्यति:।।"
कि वह सत्यवादी पिता की पुत्रियां हैं और पिता हमारे प्रभु हैं और वही हमारे परम देवता हैं वह जिसके हाथ में हमें समर्पित करेंगे वही हमारे पति होंगे"
पवन देवता ने कुपित होकर उनको शाप दे दिया जिससे वह 100 कन्याएं कुबड़ी हो गयीं। देखें
(वाल्मीकि रामायण ,1/32/16, १/३२/१७, 1/32/१९-२२)
जब राजा कुशनाभ ने ब्रह्मदत्त के साथ इनका विवाह किया तो ब्रह्म दत्त के स्पर्श करते ही यह सारी कन्याएँ कुबड़े पन से निजात पा गई और ठीक हो गयीं ।
तमाहुई महातेजा ब्रह्मदत्ततं महिपति:।
ददौ कन्या शतम् राजा सुप्रीतेनं तरातत्मना।।
यथाक्रमं तदा पणिजग्राहररघुनंदन।
ब्रह्मदत्तो महिपाल स्तासांदेवपतिर्यथा।।
अर्थात इसके बाद महा तेजस्वी राजा ने ब्रह्मदत्त को बुलाकर अपनी 100 कन्याएं उनको समर्पित कर दी। इंद्र के समान ब्रह्मदत्त राजा ने यथाविधि उन कन्याओं का परि ग्रहण (विवाह) किया!
(वाल्मीकि रामायण 1/33/ 21-22)
आगे लिखा हुआ है ब्रह्म दत्त के हाथ लगाते ही कन्याओं का कुबड़ापन दूर हो गया। देखें
(वा0रा01/33/22)
◆ श्री रामचंद्र जी के पूर्वज सूर्यवंशी राजा सगर की पत्नियों की संख्या ◆
सूर्यवंशी राजा सगर श्री रामचंद्र जी के पूर्वजों में से एक हैं यह बहुत ही धार्मिक राजा माने गए जिन की दो पत्नियां थी जिनमें बड़ी पत्नी का नाम केशनी एवं दूसरी छोटी पत्नी का नाम सुमति था।
प्रारंभ में उनके कोई संतान नहीं थी परंतु भृगु मुनि के वरदान द्वारा काफी समय बाद उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई दोनों पत्नियों से उनके 60,0001(साठ हज़ार एक ) पुत्र पैदा हुए जो इस प्रकार हैं छोटी पत्नी से उन्हें यानी सुमति से उन्हें 60,000 पुत्र प्राप्त हुए एवं बड़ी पत्नी केशनी से उन्हें केवल एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम "असमंजस"( Not असमंजस पत्रिका) था जो सर्वाधिक विख्यात हुआ इसी पुत्र से राजा सगर का वंश आगे बढ़ा जिनसे बड़े-बड़े वहां तेजस्वी राजा पैदा हुए।
देखें वाल्मीकि रामायण 1/38 /2-4 एवं 1/38 /5-43)
【भारतीय धर्म ग्रंथों में बहुपत्नीत्व- 5】
पिछले लेख में हम भारतीय धर्म ग्रंथों के मुख्य पात्रों एवं सुप्रसिद्ध भगवानों आदि के प्रमाण पेश किए थे मैं 300 से अधिक प्रमाण प्रस्तुत कर सकता हूं जिनमें वेदों एवं पुराणों आदि प्रमुख हैं परंतु केवल उन्हीं धार्मिक ग्रंथ और हस्तियों के प्रमाण प्रस्तुत किया जो आजकल आम जनता के बीच में भ्रमण करते रहते हैं आज सभी प्रमुख भगवानों एवं देवताओं को छोड़ते हुए भारतीय धर्म ग्रंथों के उन नियमों का अध्ययन करते हैं जिनसे बहुपत्नीत्व के प्रमाण मिलते हैं ।
अब आप..........
■धर्म शास्त्रों के नियम■
◆ पति द्वारा दूसरा विवाह करने पर पहली पत्नी द्वारा पति की दूसरी पत्नी से अच्छे व्यवहार का आदेश ◆
भविष्य पुराण में लिखा हुआ है कि यदि किसी पत्नी का पति दूसरा विवाह कर ले तो पहली पत्नी को अर्थात पति की नई दूसरी पत्नी को अपनी बहिन समझना चाहिए
देखें (भविष्य पुराण 1/13/31)
यही नहीं पहली पत्नी को यह आदेश भी दिया गया है कि वह दूसरी पत्नी को प्रथम समागम अर्थात सुहागरात आदि कार्यों को भली प्रकार से संपन्न करने की शिक्षा दे।
देखें ( भविष्य पुराण 1/13/33)
◆ नई पत्नी को पति के प्रथम पत्नी द्वारा कामकला की शिक्षा देने का आदेश ◆
इसी प्रकार वात्सायन मुनि जी कहते हैं कि
नायकसंश्रयवे च रहसि विशेषानिधिकान् दर्शयेत्।
अर्थात.... "वह उस नई बहू को ऐसे एकांत स्थान में कामकला की शिक्षा दे जहां से उसका पति भी सुन सके। "
◆ सपत्नी (सौत )की सेवा करना ◆
नारदीय पुराण क्यों कहा गया है कि जो पत्नी अर्थात सौत स्वामी का भला देखते हुए सदैव अपनी सोच की सेवा करती है उसे कभी ना नष्ट होने वाले लोग की प्राप्ति होती है
" स पत्नी या सप्तयासु शुश्रुषं कुरुते सदा।
भरतुरिष्टां संरिक्षय तस्या लोकोअक्षयो भवते ।।
अर्थात .... "जो पत्नी स्वामी का भला देखते हुए सदैव अपनी सौत की सेवा करती है उसे अविनाशी लोक की प्राप्ति होती है"
(नारदीय पुराण , उ0 ,16/58)
◆ सौतन द्वारा बुरा व्यवहार करने पर आदेश ◆
धर्म सूत्र इस बात का आदेश देते हैं कि यदि किसी स्त्री को अपनी सौतन से कोई कष्ट पहुंचता है तो वह अपने पति से शिकायत ना करे कहा गया .....
"आत्मनश्च सपत्नीविकारजं दु:ख नाकक्षीत ।।
अर्थात सौत से जो कष्ट होता हो वह पति से ना कहे।
◆ कई पत्नियां होने पर केवल एक पत्नी से संतान होने पर मनुस्मृति का नियम ◆
श्री मनु जी महाराज इस संबंध में कहते हैं कि
"सर्वासामेक पत्नीनामेका चेतपुत्रिणी भवेत्।
सर्वस्तासतेन पुत्रेण प्राह पुत्र वतीर्मनु"
( देखें - मनु स्मृति,९/1८३)
अर्थात "एक पति की अनेक पत्नियां में से यदि एक ही पत्नी के पुत्र होगा तो उसी पुत्र के होने पर सभी पत्नियां पुत्रवती समझी जाएंगी ऐसा मनु ने कहा है"
◆ धन के बंटवारे द्वारा कई पत्नियों का सिद्ध होना ◆
मनुस्मृति में किसी ब्राह्मण स्त्री के मरने पर बटवारे का जो विधान दिया गया है उससे भी कई पत्नियों का होना सिद्ध होता है जैसे
" ब्राह्मण की अनेक स्त्रियों को जो धन उसके माता-पिता से मिला है यदि उनमें से कोई निसंतान मर जाए तो उसका धन उसकी ब्राह्मणी सौत की कन्या को और उनके न रहने पर उनकी संतान को मिलना चाहिए"
देखे (मनु स्मृति 9/198)
◆ जातीय आधार पर एक से अधिक स्त्रियों से विवाह ◆
अग्नि पुराण के अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य एक से अधिक यात्रियों से विवाह कर सकते हैं जबकि शूद्र के लिए एक ही पत्नी रखने का विधान है
"द्धे च वैश्यो यथाकामं भर्राये कामपि चान्त्ययज:। "
(अग्नि पुराण, 154/1 )
अर्थात ...... ब्राह्मण 4 क्षत्रिय 3 वैश्य 2 और शूद्र 1 पत्नी अपनी इच्छा के अनुसार रख सकता है। "
अभी तक आपके सामने लेखों द्वारा जो प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं उससे यह साबित होता है कि एक से अधिक पत्नी रखना कभी भी किसी समाज में किसी धर्म एवं कानून में गलत नहीं माना गया है अपितु भारतीय धर्म ग्रंथ इनके प्रमाण से भरे पड़े हैं। इसके अतिरिक्त बहुत से उदाहरण भी पेश किए जा सकते हैं जिन में बड़े-बड़े महात्मा, पंडित, देवता आदि के प्रमाण प्रस्तुत किए जा सकते हैं परंतु यहां जो प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं वह केवल इस बात को प्रदर्शित करने एवं साबित करने के लिए प्रस्तुत किये गए हैं कि बहु विवाह ना तो संविधान विरुद्ध है और ना ही धर्म विरुद्ध और यदि कोई इसके विरुद्ध बिल लेकर आता है तो वह धर्म एवं संविधान के विरुद्ध होगा।
नोट:-चूँकि संस्कृत के मंत्र एवं श्लोक हिंदी टाइपिंग से लिए गए हैं इसलिए उस में कुछ त्रुटि रह गई हैं उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं आशा है कि इन लेखों द्वारा आप सभी लाभांवित होंगे
No comments:
Post a Comment