Friday, 19 June 2020

(6) अश्लीलता, प्रथाएं, पाखंड, आडंबर।


*सनातन वैदिक धर्म की जानवरों जैसी प्रथाएं* 

● गौमूत्र पीना , गौबर लीपना
● बाबाओ से नियोग करवाना 
● सती प्रथा 
● दास प्रथा 
● देवदासी प्रथा 
● शुद्धि करण प्रथा 
● बाल विवाह 
● चरक प्रथा 
● नर बली 
● पशु बली 
● जानवरों से लड़की की शादी 
● पत्थर की पूजा 
● लिंग कि पूजा 
● योनि कि पूजा 
● ठगी प्रथा
● छोपदी प्रथा
● शुद्धिकरण प्रथा।

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*सनातन वैदिक धर्म के पाखंड* 

● इंसान की गर्दन पर हाथी का सिर बैठ गया ? 
● गणेश पार्वती के मेल से पैदा हुए थे ? 
● सीता मटके से पैदा हुई थी ? 
● राम ने अपनी गर्भवती पत्नी को वनवास भेजा ? 
● एक बंदर आम समझके सूरज निगल गया ? 
● 10 सिर वाला रावण और उसके 10 हाथ ? 
● सुअर के सिर वाला विष्णु ? 
● द्रौपदी हर रात 5 पांडवों के साथ सोके भी Virgin रहती थी? 
● श्री कृष्णा की 16108 बीवियां थी और औरतों के कपड़े  चुराना, माखन चुराना उसका काम था ? 
● मंदोदरी मेंढकी से पैदा हुईं थी ? 
● श्रृंगऋषि हिरनी से पैदा हुवा ? 
● पवनदेव कान से पैदा हुए था ? 
● मगरध्वज मगर के मुख से पैदा हुआ था ? 
● मनु सूर्यपुत्र थे छींक आने पर नाक से बच्चा पैदा हुआ था? 
● कर्ण का पिता सूर्य था जोकि एक आग का गोला है ?


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*हिंदू धर्म खतरे में हैं*

कितनी हास्यप्रद बात है।

इतने जादुई शक्तिशाली तकरीबन 33 करोड़ छोटे बडे़ देवी देवता

◆किसी के 12 हाथ
◆किसी के पास पूरा ब्रह्मांड तक को मुँह में समा लेने की ताकत
◆कोई हवा में उड़ सकता है
◆कोई एक तीर आसमान में छोड़ कर बारिश या तेज तूफान ला सकता है
◆कोई अपना आसमान जितना बड़ा कद बना लेता है
◆कोई आंख खोल कर सब कुछ भस्म कर देता है
◆कोई मौत का वाहक है
◆तो कोई प्रलय ला सकता है
◆कोई 3 कदम में पूरा ब्रह्मांड नाप सकता है
◆तो कोई अंतरयामी है, सब कुछ जानता है
◆कोई पानी पर पत्थर तैरा सकता है
◆तो कोई पूरा पहाड़ उठा कर ला सकता है। 

कमाल की बात है इतने सारे अजीबोगरीब ताकत वाले देवी-देवता होने पर भी धर्म खतरें में है। तो क्या अब स्पाइडर मैन या सुपर मैन को लाना पड़ेगा ?
 
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*हिन्दू धर्म की मूर्खताएं*

1- सती प्रथा सिर्फ़ *हिन्दू धर्म* में ही पायी जाती थी।

2- जन्म से छोटा या बड़ा, *हिंदू धर्म* मे शुरू से ही तय हो जाता था।

3- लोग पढ़ेंगे या नाली साफ करेंगे, यह बात भी *हिन्दू धर्म* में जन्म से ही तय हो जाती थी।

4- कोई इंसान इज़्ज़तदार बनेगा या गालियाँ सुनने की मशीन बनेगा, यह बात भी *हिन्दू धर्म* जन्म से ही तय करता रहा हैI

5- लोग कौन सा काम करेंगे और  कौन सा नही करेंगे,  यह बात भी *हिंदू धर्म* जन्म से तय कर देता थाI

6- गरीबों की कन्याओं को मंदिर मे देवदासी बनाकर उनका यौन शोषण करने की मूर्खतापूर्ण परम्परा भी *हिन्दू धर्म* में ही पायी जाती थी।

7- बाल विवाह तो *हिन्दू धर्म* की शान रही हैंI

8- अक्सर अमीरी-ग़रीबी भी *हिन्दू धर्म* में जाति के अनुसार ही तय होती रही  है।

9- ज़मींदार भी यहाँ जाति के आधार पर *हिन्दू धर्म* मै होते रहे हैं।

10- नीची जाति की महिलाओं का बलात्कार *हिन्दू धर्म* की देन है।

11- नियोग प्रथा *हिन्दू धर्म* की देन है ।

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हिन्दू_धर्म_का_विचित्र_इतिहास_आप_भी_जाने।

1- मंदोदरी " मेंढकी " से पैदा हुई थी !
2- " श्रंगी ऋषि " " हिरनी " से पैदा हुये थे !
3- " सीता" " मटकी" मे से पैदा हुई थी !
4- " गणेश " अपनी " माँ के मैल " से पैदा हुये थे !
5- " हनुमान " के पिता पवन " कान " से पैदा हुये थे !
6- हनुमान का पुत्र # मकरध्वज था जो # मछ्ली के मुख से पैदा हुआ था !
7- मनु सूर्य के पुत्र थे उनको छींक आने पर एक लड़का नाक से पैदा हुआ था !
8- राजा दशरथ की तीन रानियो के चार पुत्र जो फलो की खीर खाने से पैदा हुये थे।
9- सूर्य कर्ण का पिता था। भला सूर्य सन्तान कैसे पैदा कर सकता है वो तो आग का गोला है !

" ब्रह्मा " ने तो 4 वर्ण यहां वहां से निकले हद है !! " दलित " का बनाया हुआ " चमड़े का ढोल"। मंदिर में बजाने से मंदिर अपवित्र नहीं होता!
" दलित " मंदिर में चल जाय तो मंदिर " अपवित्र " हो जाता है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं की ढोल किस जानवर की चमड़ी से बना है। उनके लिए मरे हुए जानवर की चमड़ी पवित्र है, पर जिन्दा दलित अपवित्र। " बुद्धिजीवी " प्रकाश डाले !! दिमाग की बत्ती जलाओ अंधविश्वास भगाऔ

यदि " पूजा-पाठ " करने से ही " बुद्धि " और " शिक्षा " आती तो... " पंडों की औलादें " ही विश्व में वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर " होती..!! " वहम् " से बचों अपने बच्चों को " उच्च शिक्षा " दिलवाओ. क्योंकि, " शिक्षा " से ही " वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर " और शासक बनते हैं ..! " पूजा-पाठ " से नहीं..!

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भगवान ने सब कुछ दिया।

1,नशा करना भोलेनाथ ने सिखाया।
2,बेईमानी,छल,कपट को श्री कृष्ण ने सिखाया।
3,तलाक देकर नारी को बेघर करना श्री राम ने सिखाया।
4,झूठ बोलना नारदमुनि ने सिखाया।
5,भीख माँगना श्री साईनाथ ने सिखाया।
6,स्त्री को बुरी नजर से देखना श्री कृष्ण ने सिखाया।
7,जानवरो की हत्या करना श्री राम ने सिखाया।
8,नारी पर अत्याचार करना लक्ष्मण ने सिखाया।
9, जुऑ खेलना पांडवो ने सिखाया
10,नारी का सटा लगाना भी पांडवो ने सिखाया ।

अगर भगवान नही होता तो दुनिया में एक भी अपराध नही होते! 

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विक्की सिंह भदौरिया 
राम लक्षमण भरत शत्रुघ्न उनकी माताओ के द्वारा खीर खाने से पैदा हुए। 

राजा जनक का एक नग्न स्त्री को देखकर वीर्य टपक गया जो धरती में गिरा अगले दिन सीता एक बलीहारे के खेत में पायी गयी। 

हनुमान के पसीने से एक मादा मगरमच्छ pregnant हो गयी और उसने मकरध्वज को जन्म दिया। 

हनुमान की को पवन ने हनुमान की माता अंजनी को गर्भवती किया हनुमान हवा में पैदा हो गए यानि बैटिंग किसी और की छक्का कोई और मार गया। 

कमल से ब्रह्मा पैदा हुए
फिर ब्रह्मा ने अपनी पार्शव ( पसलिया ) रगड़ी तो दाई पसलियों से विष्णु और बाई से शिव पैदा किया
इसी कड़ी में शिव ने अपने माथे का पसीना पोछकर जमीन की तरफ झटका तो विष्णु और अपनी जाँघ रगड़ी तो ब्रह्मा पैदा हुए। 

पता नहीं किसने किसको पैदा किया, और ब्राह्मण क्या साबित करना चाहते है।
पार्वती ने मिट्टी से गणेश की निर्माण किया।
विष्णु की नाक से सूअर का जन्म हुआ।
पांडवो की माता जंगल में गयी तो पाँच पांडवो का जन्म हुआ। 

असुरो के अतिक्रमण की वजह से त्रिदेवो ब्रह्मा विष्णु महेश की भौंहें तन गयी और तीनो देवो के मुख से एक तेज निकला जो एक हो गया और वैष्णवी (दुर्गा ) का जन्म हुआ ??? 

" "जागो बहुजन जागो" जिन पाखंडियों की पाखंडी व्यवस्था ने तुम्हें सदियों तक जानवर बना रखा,
धिक्कार है तुम पर अगर ऐसी गंदी व्यवस्था को आज भी मान रहे हो तो। 

रावण का ही दहन क्यों?
• इन्द्रदेव ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के साथ बलात्कार किया, उसका दहन क्यों नही?
• राजा पांडु ने माधुरी के साथ बलात्कार किया, उसका दहन क्यों नही? 

• ऋषि पाराशर ने केवट की लडकी सत्यवती के साथ बलात्कार किया, उसका दहन क्यों नही?
• वृहस्पति की पत्नी तारा का वनमंत्री चन्द्र ने अपहरण करके बलात्कार किया, उसका द

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एंटिनाधारीयो के लिए कुछ सवाल ??

देवताओं की संख्या तैंतीस करोड़ है उससे उत्पन्न कुछ सवाल

1. सबसे पहले कौन सा देवता उत्पन्न हुआ और उसको उत्पन्न किसने किया ?
2. सबसे पहले कौन सी देवी उत्पन्न हुई और उसको किसने उत्पन्न किया ?
3. सबसे पहले कोई देवता उत्पन्न हुआ या कोई देवी ?
4. तैंतीस करोड़ की जनसँख्या सिर्फ देवताओ की ही है या उसमे देवी भी शामिल हैं ?
5. देवताओं की संख्या तैंतीस करोड़ होने में कितना समय लगा ?
6. तैंतीस करोडवां नंबर किस देवता का है ? वह देवी है या देवता है ?
7. अगर तैंतीस करोड़ में देवी भी शामिल हैं तो इनमे देवियों की संख्या कितनी है ?
8. देवताओं की जनसँख्या तैंतीस करोड़ पर ही क्यों टिकी हुयी है उनकी जनसँख्या में वृद्धि या कमी क्यों नहीं हुयी ?
9. क्या सभी देवता स्वर्ग में ही वास करते हैं या कुछ देवता नर्क में भी रहते हैं ?
10. अगर सभी देवता स्वर्ग में ही निवास करते हैं तो फिर यमराज को नर्क का स्वामी क्यों बनाया गया है ?
क्या यमराज देवता नहीं हैं ?
क्या नर्क में भेजकर यमराज को भी किसी गुनाह की सजा दी जा रही है ?
11. यमराज का मुंशी चित्रगुप्त कौन है ? चित्रगुप्त कोई देवता है या दानव या मानव ? 

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●● *Before Insulting Other Religion First know About 33KOTI HINDU Dev- Devi Travel To "HEAVN" and "EARTH" and "PATAL" ??*●●  

■Shitala Devi— *Donkey*
■BRAHMA DEVA and HIS Daughter cum Wife SARASWATI DEVI - *Swan*
it’s a bird which can figuratively sift the pure from the impure, like it sieves milk from water
■Durga Devi – *Lion*
■Ganesha Dev– *Mouse*
■Indra Dev– *Elephant*
■Kartikeya Dev – *Peacock*
■Lakshmi Devi– *Owl*
■Shani Dev– *Crow/Raven/Vulture*
■Shashthi Devi– *Cat*
■Shiva– *Bull*
■Vishnu– *Eagle*
■Yama– *Male Buffalo*
■Ayyappa– *Tiger*
■*Vayu (the wind god) rides on- *a HORSE.* ■Varuna (the water god) rides the waves on- *a CROCODILE*
■The river goddess Yamuna drifts on a - *TORTOISE* 
■Bhairava, a manifestation of Shiva, has chosen- *a DOG as his vehicle*

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*कौन कहता है कि आर्य ब्राह्मणों ने अविष्कार नहीं किया है* 

Part 1

साथियों कुछ महान आविष्कार है जो केवल भारत में ही हुए है और जिनका उपयोग केवल भारतवासी कर सकते और किसी देश में इनका कोई उपयोग नहीं है:-

१. *लिंग पूजन* का आविष्कार भारत में हुआ। 

२. *योनी पूजन* का आविष्कार भारत में हुआ (कामाख्या)।

३. *लहसून, प्याज* खाने से पाप लगता है का आविष्कार भारत में हुआ।

४. *खीर खिलाकर गर्भवती* करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।

५. *हवन का केला खिलाकर* गर्भवती करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।

६. *धरती चीर कर बच्चा पैदा* करने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।

७. *वानर सूरज* को *आम समझ खा* सकता है का आविष्कार भारत में हुआ।

८. *सूरज को कांख में दबा कर* उड़ने की तकनीक का आविष्कार भारत में हुआ।

९. *देवी-देवताओं* का आविष्कार भारत में हुआ।

१०. *गंगा में नहा कर पाप धोने* का आविष्कार भारत में हुआ।

११. *गाय माता* है का आविष्कार भारत में हुआ।

१२. *ग्रहों के प्रकोप* का आविष्कार भारत में हुआ।

१३.  *पूजा पाठ कर भगवान को खुश* करने का आविष्कार भारत में हुआ।

१४. *हवन से प्रदूषण खत्म होता* है का आविष्कार भारत में हुआ।

१५. *वर्षा के देवता इंन्द्र देव* का आविष्कार भारत में हुआ।

१६. *हवन से इंद्र देव को खुश कर बारिश* कराने का आविष्कार भारत में हुआ।

१७. *मंदिरों* में एवं *ब्राह्मणों* को *दान* देने से *पुण्य प्राप्ति* होती है का आविष्कार भारत में हुआ।

१८. *मृत व्यक्ति को परलोक में खाना, बिस्तर, पलंग, चप्पल-जुता, रुपया-पैसा, सोना-चांदी* आदि श्राद्ध के द्वारा पहुँचाने का आविष्कार भारत में हुआ।

१९. *जात-पातका* आविष्कार भारत में हुआ।

२०. *छोटी जात* का मंदिर में प्रवेश मात्र से *भगवान अशुद्ध* हो जाता है का आविष्कार भारत में हुआ।

२१. *देवदासी* का निर्माण भारत में हुआ।

२२. *पुजारीयों* द्वारा *देवदासियों के बलात्कारों* से *उत्पन्न संतान हरिजन* होता है का आविष्कार भारत में हुआ।

२३. *बत्तख पानी* recycle करती है का आविष्कार भारत में हाल ही में हुआ है।

२४. *गाय अॉक्सीजन लेती है और छोड़ती भी अॉक्सीजन* ही है का आविष्कार भारत में अभी-अभी हुआ है। 

२५. एक गाय में *33 करोड़ देवता* पाए जाते हैं ।

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*हिन्दू ब्राह्मण धर्म की भयानक प्रथाएं*

*आर्य ब्राह्मणों* नें भारत के *मूलनिवासियों* जो पहले शूद्र कहे जाते थे उनको जातियों में बॉटकर एक दूसरे से वैमनस्यता पैदा कर दी उसके बाद भयानक प्रथायें चलाईं गयी कुछ निम्न है--

* दास प्रथा--*
इसमें *शूद्रों* को *ब्राह्मणो*, का दास बनना पडता था उनके घरों पर पानी भरना,पशुओं को चारा करना,घर की महिलाओं ,पुरूषों के कपडे धोना,तथा घर का मैला उठाना पडता था जो लोग इस काम को नही करना चाहते थे *उन्हे १०० कौडे और गॉव से निकाल दिया जाता था.*

*नियोग प्रथा--*
वेदादिक शास्त्रों में पति द्वारा संतान उत्पन्न न होने पर या पति की अकाल मृत्यु की अवस्था में ऐसा नियमबद्ध उपाय है जिसके अनुसार *स्त्री अपने देवर, जेठ, ससुर, ताऊ, चाचा, मामा सबके संग संभोग अथवा सम्गोत्री से गर्भाधान करा सकती है।* यदि पति जीवित है तो वह व्यक्ति स्त्री के पति की इच्छा से केवल एक ही और विशेष परिस्थिति में दो संतान उत्पन्न कर सकता है। इसके विपरीत आचरण राजदंड प्रायश्चित् के भागी होते हैं। वैदिक प्रथा के अनुसार नियुक्त पुरुष सम्मानित व्यक्ति होना चाहिए, मतलब सिर्फ ब्राम्हण।

*नरि बल प्रथा--*
इसमें ब्राह्मणों के देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिये शूद्र स्त्री-पुरूषों के *मन्दिर पर सिर पटकपटक मार दिया जाता था.*

* शुध्दिकरण प्रथा--*
इसमें *शूद्रों* की शादी होने पर *दुल्हन* अपने पति के घर नही जाती थी और कम से कम *तीन दिन ब्राह्मण के घर शारीरिक सेवा देनी पडती थी* तभी दुल्हन को शुध्द माना जाता था.

* देवदासी प्रथा--*
इसमें ब्राह्मणों के कहने पर शूद्र अपनी लडकियों को मन्दिरों पर दान देते थे मन्दिर के पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे

*देवदासी प्रथा*

दासता का एक रूप सदियों से चला आया है। वह है -देवदासियां। मंदिरों विशेषतः दक्षिण भारत के मंदिरों में देवदासियां रहती हैं। यह वे लडकियां हैं जिन्हें उनके माता पिता बचपन में ही मंदिरों में चढ़ा देते हैं। वहीँ यह जवान होती हैं। इन का देवता के साथ विवाह कर दिया जाता है। इन में से कुछ सुन्दर स्त्रियाँ पन्देपुजारोयों के भोगविलास की सामग्री बनती हैं। शेष देवदर्शन को आए हुए यात्रियों आदि व अन्य लोगों की कामवासना को शांत कर के जीवन निर्वाह करती हैं. 14 अगस्त, 1953 से देवदासी प्रथा कानूनन अवैध घोषित कर दी गयी है। फिर भी यह प्रथा किसी न किसी रूप में हिन्दू मंदिरों में मौजूद है।

*चरक प्रथा--*
इसमें *ब्राह्मण* जब अपना आलीसान मकान का निर्माण करता था तो शूद्रों को पकडकर *जिन्दा चिनवा देता था* इस प्रथा में माना जाता था कि शूद्रों को चिनवाने से मकान अधिक दिनों तक टिकाऊ रहेगा 

* सती प्रथा--*
*ब्राम्हण* धर्म की यह अमानवीय कुप्रथा थी जिसमे किसी स्त्री के पति की मृत्यु हो जाने पर उसको *पति के साथ बांधकर ज़िंदा जलाया जाता था* इस जघन्य अपराध को अंग्रेजो की मदद से बड़ी मुश्किल से ख़तम किया जा सका.

*ठगी प्रथा -
ठग समाज के द्वारा लोगों को लूटने के बाद मां काली की सेवा में मौत के घाट उतार दिया जाता था।

*छोपदी प्रथा-
मासिक धर्म के समय मे लड़कियों को घर के अंदर रहना वर्जित हो जाता है इसलिये उन्हें बाहर झोपड़ी या पशु के बाड़े में रहना पड़ता है।

*अब हमें खुद सोचने पर मजबूर होना चाहिये कि हमारे पूर्वजों ने कितनी जिल्लत और यातना भरी जिन्दगी जी होगी फिर भी हम है कि उन्ही के पूर्वजों ब्रह्मा,बिष्णु,महेश,काली,दुर्गे,गणेश,आदि की पूजा पाठ करते है और ब्राम्हणी कुरीतियों को ढो रहे है अब हमारे समाज को कुरीतियों से छुटकारा पाना ही होगा तभी समाज ब्राम्हणी दासता से मुक्त होगा ....*

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*ब्राह्मणी (हिन्दू) धर्म के भगवान् लोग ही औरतों की इज्जत नहीं करते तो उनको मानने वाले लोग क्या ख़ाक इज्जत करेंगे?*

*१.परशुराम:* ब्राह्मण लोगों का और उनकी चाटने वालों का देवता, और विष्णु का अवतार *परशुराम* ने अपनी माँ का सर कुल्हाड़ी से उड़ा दिया था।

*२.कृष्णा:* विष्णु का अवतार, *ये तो खुद औरतों को छेड़ता था* उनके कपडे नहाते समय लेके भाग जाता था। उनकी मटकिया फोड़ के उनको मानसिक कष्ट देता था और मीरा को धोखा देके इसने *राधा से ब्याह रचाया।*

*३.ब्रह्मा:* सृष्टि की जिसने उत्पति की ब्रह्मा, *ब्रह्मा ने तो अपनी पुत्री सरस्वती का ही बलात्कार कर डाला।*

*४.पांडव:* पांडवों ने बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी, *अपनी बीवी को बेइज्जत करके, सरे आम उसको नीलाम कर दिया। दांव पे लगा दिया।* जब उसकी इज्जत लूटी जा रही थी तो किसी ने भी अपनी पत्नी की इज्जत बचाने की कोशिश नहीं की, सब बेशर्मी से देखते रह गए।

*५.राम:* और एक विष्णु का अवतार, बहुत ही पॉपुलर, भगवान् श्री राम! पहले तो अपनी *पत्नी सीता को अग्नि परीक्षा देने के लिए विवश किया, फिर भी इस भगवान का शक कम नहीं हुआ और एक धोबी के कहने पर अपनी पत्नी को घर से निकल दिया* वो भी तब जब सीता गर्भवती थी। सीता को अग्नि से गुजार दिया लेकिन खुद कभी कोई परीक्षा नहीं दी।

ये सभी *भगवानों* के अवतार औरत जात की कोई इज्जत नहीं करते थे। *उनको मानसिक कष्ट देना, उनकी बेइज्जती करना, उनका बलात्कार करना ये ही ब्रहमाणी धर्म के देवता करते थे।* जब ये *भगवान* खुद औरतों की छेड़खानी, बलात्कार, मानसिक उत्पीडन किया करते थे तो *इनके भक्त इनकी ही राह पर ही तो चलेंगे ना?* इसीलिए आज देखिये देश में औरतों पर अत्याचार कितना बढ़ रहा है, यह सब इन अवतारी भगवानों की ही देन, इन सभी अवतारी भगवानों ने मनुष्य जाति के प्रति अपराध किया है। 

*ब्राह्मण धर्म* में ऐसा कोई *देवता या भगवान* नहीं है जो औरत जात की इज्ज़त करता था। यहाँ तक *ब्राह्मण धर्म* के *ऋषि मुनियों,* जिनको ज्ञान का भंडार कहा जाता था वो भी कभी किसी भी स्त्री का कोई सम्मान नहीं करते थे। *स्त्रियों को सिर्फ भोग की वस्तु समझते थे। स्त्रियों के शोषण के लिए बहुत से तरीके ईजाद किये गए थे। जैसे अश्वमेघ यज्ञ, पुत्रेष्ठि यज्ञ, नियोग प्रथा, योनी अयोनी प्रथा आदि* इन सभी प्रथाओं के द्वारा स्त्रियों का बहुत बुरी तरह शोषण किया जाता था।

अब *बाबाओं* की बाबागिरी एक एक करके सबके सामने आने लगी है। *एक बाबा का घिनौनापन अभी दिमाग से हटता नहीं कि दूसरे बाबा की दरिन्दगी सामने आ जाती है।* ये लोग धर्म और आस्था के नाम पर लोगों के विश्वास का गला घोट देते हैं। नवरात्री में कन्याओं को ज्यादा महत्व दिया जाता है वहीं हमारे देश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां आस्था के नाम पर लड़कियों के साथ जो किया जाता है उसे सुनकर आपकी रुह कांप जाएगी।

*आस्था के नाम पर अश्लीलता:*

*तमिलनाडू* के मैदूर में स्थित मंदिर में 7 लड़कियों को 15 दिनों तक देवी बना कर रखा जाता है। गांव के लोग चुनी गई 7 लड़कियों को सबसे भाग्यवान मानती है। *गांव की सभी लड़कियों को पहले पंडित के सामने परेड करना होता है। परेड के बाद इन लड़कियों का चुनाव एक पुरुष पंडित करता है।*

15 दिन तक यहीं रूकती है लड़कियां:

*चुनी गई लड़कियों को मंदिर में 15 दिन रहना होता है। रहना तक तो ठीक हैं लेकिन इनको कमर से उपर तक निःवस्त्र किया जाता है। 15 दिनों तक मंदिर में कैद इन लड़कियों के पास कोई नहीं जा सकता। इस दौरान केवल पंडित ही उनकी देखरेख वहां रहकर करता है।* उनकी उम्र 10-14 साल होती है।_________________________________________________________

*धर्म झूठा है,या विज्ञान झूठा है*_

*धर्म* और *शास्त्र* 

*विवेक और विज्ञान* के दुश्मन  है ....कैसे ? 

1. _*विज्ञान व भूगोल*_:-

गंगा हिमालय के गंगोत्री हिमनद (ग्लेशियर) से निकलती है।

_*धर्म व शास्त्र*_:-

गंगा शिवजी की जटा से निकलती है और भगीरथ इसे स्वर्ग से धरती पर लाया था।


2. _*विज्ञान व भूगोल*_:-

जल-बाष्पसे भरे बादल जब हवाओं के सम्पर्क में आते हैं तो वर्षा होती है

जबकि _*धर्म व शास्त्र*_:-

वर्षा इंद्र देवता कराते हैं।


3. _*विज्ञान व भूगोल*_:-

पृथ्वी अपनी धुरी पर 23 डिग्री झुकी हुई है। जब दो tectonic plates आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है।

जबकि _*धर्म व शास्त्र*_:-

पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और जब वह करवट बदलता है तो भूकम्प आता हैं। दूसरी जगह लिखा है कि पृथ्वी बैल/गाय के सीगं पर टिकी हुई है और थक कर जब वह सीगं बदलता/ती है तो भूकम्प आता है।


4. _*विज्ञान व भूगोल*_:-

पृथ्वी और चन्द्रमा परिक्रमा करते हुऐ जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य आ जाती है तो चंद्र ग्रहण होता है।

जबकि _*धर्म व शास्त्र*_:-

चंद्र ग्रहण के समय राहु चन्द्रमा को खा जाता है।


5. _*विज्ञान*_:-

हवाई जहाज के माध्यम से मानव हवाई सैर करता है।

जबकि _*धर्म व शास्त्र*_:-

बिना किसी माध्यम के तथाकथित देवी देवता और राक्षस हवा में उड सकते थे।


6. _*विज्ञान*_:-

यहां कौसो दूर भी दूरसंचार के माध्यम से मानव एक दूसरे से मन की बात कर सकते हैं।

जबकि _*धर्म व शास्त्र*_:-

केवल साधु- संत ही बिना किसी माध्यम के ही मन की बात उन्हीं के बनाये ईश्वर से कर लिया करते थे।

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1:- सभी देवी देवताओ ने भारत मे हि जन्म क्यो लिया?क्यो किसी भी देवी देवता को भारत के बाहर कोइ नही जानता ?

2:- जितने भी देवी देवता देवताओ की सवारीया है उनमे सिर्फ वही जानवर क्यो है जो कि भारत मे ही पाये जाते है? एसे जानवर क्यो नही जो कि सिर्फ कुछ हि देशो मे पाये जाते है, जैसे कि कंगारु, जिराफ आदी !!

3:- सभी देवी देवता हमेशा राज घरानो मे हि जन्म क्यो लेते थे ? क्यो किसी भी देवी देवता ने किसी गरीब या शुद्र के यहा जन्म नही लिया?

4:- पोराणीक कथाओ मे सभी देवी देवताओ की दिनचर्या का वर्णन है जैसे कि कब पार्वती ने चंदन से स्नान किया, कब गणेश के लिये लड्डु बनाये, गणेश ने कैसे लड्डु खाये.. आदी। लेकीन जैसे हि ग्रंथो कि स्क्रीप्ट खत्म हो गयी भगवानो कि दिनचर्या भी खत्म..तो क्या बाद में सभी देवीदेवताऔ का देहांत हो गया ?? अब वो कहाँ है? उनकी औलादे कहाँ है?

5:- ग्रंथो के अनुसार पुराने समय मे सभी देवी देवताओ का पृथ्वी पर आना-जाना लगा रहता था। जैसे कि किसी को वरदान देने या किसी पापी का सर्वनाश करने.. लेकीन अब एसा क्या हुआ जो देवी देवताओ ने पृथ्वी पर आना बंद हि कर दिया??

6:- जब भी कोइ पापी पाप फैलाता था तो उसका नाश करने के लिये खुद भागवान किसी राजा के यहा जन्म लेते थे फिर 30-35 की उम्र तक जवान होने के बाद वो पापी का नाश करते थे, ऐसा क्यों? पापी का नाश जब भगवान खुद हि कर रहे है तो 30-35 साल का इतना ज्यादा वक्त क्यो??? 
भगवान सिधे कुछ क्यो नही करते?? जीस प्रकार उन्होने अपने खुद के ही भक्तो का उत्तराखण्ड मे नाश किया ?

(7) अगर हिन्दू धर्म कई हज़ार साल पुराना है, तो फिर भारत के बाहर इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं हुआ और एक भारत से बाहर के धर्म “इस्लाम-ईसाई” को इतनी मान्यता कैसे हासिल हुई? वो आपके अपने पुरातन हिन्दू धर्म से ज़्यादा अनुयायी कैसे बना सका? हिन्दू देवी-देवता उन्हें नहीं रोक रहें??

(8) अगर हिन्दू धर्म के अनुसार एक जीवित पत्नी के रहते, दूसरा विवाह अनुचित है, तो फिर राम के पिता दशरथ ने चार विवाह किस नीति अनुसार किये थे?

(9) अगर शिव के पुत्र गनेश की गर्दन शिव ने काट दी, तो फिर यह कैसा भगवान है?? जो उस कटी गर्दन को उसी जगह पर क्यों नहीं जोड़ सका??क्यों एक पिरपराध जानवर (हाथी) की हत्या करके उसकी गर्दन गणेश की धढ पर लगाई? एक इंसान के बच्चे के धढ़ पर हाथी की गर्दन कैसे फिट आ गयी?

(10) अगर हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित है, तो फिर राम स्वर्णमृग (हिरन) को मारने क्यों गए थे? क्या मृग हत्या जीव हत्या नहीं है?

(11) राम अगर भगवान है, तो फिर उसको यह क्यों नहीं पता था कि रावण की नाभि में अमृत है? अगर उसको घर का भेदी ना बताता कि रावण की नाभि में अमृत है, तो उस युद्ध में रावण कभी नहीं मारा जाता। क्या भगवन ऐसा होता है?

(12) तुम कहते हो कि कृष्ण तुम्हारे भगवन हैं, तो क्या नहाती हुई निर्वस्त्र गोपीयों को छुपकर देखने वाला व्यक्ति, भगवान हो सकता है? अगर ऐसा काम कोई व्यक्ति आज के दौर में करे, तो हम उसे छिछोरा-नालायक कहते हैं। तो आप कृष्ण को भगवान क्यों कहते हो?

(13) हिन्दूओ में बलात्कारीयोंका प्रमाण अधिक क्यों होते हैं?

(14) शिव के लिंग (पेनिस) की पूजा क्यों करते हैं? क्या उनके शरीर में कोई और चीज़ पूजा के क़ाबिल नहीं?

(15) खुजराहो के मंदिरों में काम-क्रीड़ा और उत्तेजक चित्र हैं, फिर ऐसे स्थान को मंदिर क्यों कहा जाता है? क्या काम-क्रीडा, हिन्दू धर्मानुसार पूजनीय है?

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सिद्ध करो राम थे या स्वीकार करो कि रामायण काल्पनिक ग्रंथ है...

(1). एक समय पर दो तरह के इंसान कैसे हो सकते हैं? एक पूंछ वाला और एक बिना पूंछ वाला..l दोनों मनुष्य की तरह बोलते हैं दोनों के पिता राजा हैं क्या ऐसा संभव है?
(2). मेंढक से मंदोदरी कैसे बन सकती हैं/ पैदा हो सकती है?
(3). लंगोटी का दाग छुड़ाने से अंगद कैसे पैदा हो सकता है??  पक्षी मनुष्य की तरह कैसे काम कर सकता है जैसे  गिद्धराज?? 
(4). किसी मनुष्य के 10 सिर हो ही नहीं सकते इतिहास या पुरातत्व द्वारा आज तक ये सिद्ध नहीं हो पाया कि किसी इंसान के  10 सिर 20 भुजाओं वाला कोई मनुष्य नहीं है.
(5). जिस लंका की आप बात कर रहे हो,उसका नाम भी 1972 में लंका पड़ा। इसके पहले सिलोन व सीलोन से पहले सिहाली इत्यादि नाम थे तो असली लंका कहा है?
(6). घड़े से लड़की कैसे पैदा हो सकती है?  एक माह में मकरध्वज कैसे पैदा हुए? 
मछली से कोई  मनुष्य कैसे पैदा हो सकता है? एक माह में मकरध्वज पातालपुरी में नौकरी करने लगे क्या ये संभव है? अगर संभव है तो साबित करो.
(7). 5000 साल पुरानी द्रविड़ भाषा को कोई पढ़ नहीं सकता तो 70000 साल पहले अंगद किस भाषा शैली क्या थी?
(8). सम्राट अशोक के काल में अयोध्या का नाम साकेत था तो अयोध्या के बाद साकेत और साकेत के बाद अयोध्या नाम कैसे पड़ा? पुरातत्व विभाग की तरफ से एक भी प्रमाण हो तो बताओ कि राम राज्य था?
(9). सात घोड़ों से सूर्य कैसे चल रहा है?? आपकी पुस्तकें कह रही हैं जबकि विज्ञान कह रहा है कि सूर्य चलता ही नहीं है. जब राम का राज्याभिषेक हो रहा था तब  सूर्य एक महीने के लिए रुक गया था, आपकी किताबों में लिखा है। जबकि सूर्य चलता ही नहीं है अगर सूर्य चलता है तो सिद्ध करो /साबित करो. 
(10). सूर्य खाने गए हनुमान की स्पीड और कद क्या था?? जो हनुमान सूर्य की आग से नही जल सकता, वह पुंछ में लगी आग से कैसे जल सकता है??
(11). बालमीक रामायण कहती है चैत अमावस्या को रावण का वध होता है
तुलसीकृत रामायण कहती है कुमार दशहरा को रावण का वध होता है तो सच क्या है??
(12). सोने की खोज हुए 4000 साल हुए हैं तो 70000 साल पहले सोने की लंका कहां से आई थी?? सोने का गलनांक 3000℃ से अधिक होता है, तो बताओ पुंछ की आग से इतना तापमान कैसे बढ सकता है?  सोने का महल था या सोने की लंका? 6000 साल पूर्व सभी चमड़े का परिधान पहनते थे तो 70000 साल पूर्व कपड़े राम कहां से पहनते थे??
(13). जब ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण पैदा हुआ तो भारत में ही क्यों पैदा हुआ?? जबकि ब्रह्मा ने ब्रह्मांड रचाया तो चीन अमेरिका थाईलैंड जापान दक्षिण कोरिया वगैरह वगैरह दुनिया के बाकी देशों में ब्राह्मणों क्यो पैदा नहीं हुआ या होता ??
आज भी बामण किसी के मुख से पैदा होते है या जननांग से।
(14). वह कोनसा सॉफ्टवेयर था जिसे पता चल जाता था कि लक्ष्मण रेखा को  सीता पार करे तो कुछ नही हुआ परन्तु रावण पार कर तो जल उठे???
(15). जिस धनुष को रावण उठा नही सका, उसी धनुष को उठाने वाली सीता को रावण कैसे उठा सकता है??


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1 July के दिन देवशयनी एकादशी थी, कहते हैं सारे देवता इस दिन से आने वाले चार मास तक सो गए | 
"भागवत महापुराण के अनुसार, श्रीविष्णु ने एकादशी के दिन विकट आततायी शंखासुर का वध किया, अत: युद्ध में परिश्रम से थक कर वे क्षीर सागर में सो गए। उनके सोने पर सभी देवता भी सो गए, इसलिए यह तिथि देवशयनी एकादशी कहलाई।" 
अब निम्न प्रश्न होते हैं :-
.  
1) जब सारे देवता सो गए तो अब जो जाग रहे हैं वे सारे क्या हैं ??? जो जाग रहे हैं वे कौन हैं ??? देवता का विरोधी शब्द होता है लेवता | जो देता है उसे देवता कहते हैं और जो ले वो लेवता | दूसरा देवता का विरोधी शब्द असुर व राक्षस भी होता है तो ये जो जाग रहे हैं वे सब कौन हैं ???
2) चार दिन बात जब गुरु-पूर्णिमा आयेगी तब सोये हुए गुरु का पूजन/सत्कार  होगा या जागे हुए गुरु का ?? क्यों कि गुरु भी एक देवता होते हैं | सत्य-उपदेश करने वाले को ही गुरु कहते हैं और उसे ही देवता कहते हैं .......... अब यदि गुरु जी अर्थात् गुरु रूपी देवता भी सो गए हैं तो सत्य का उपदेश कौन करेगा ?? और जो उपदेश करेगा वह सत्य होगा या असत्य ?? 
3) जब सारे देवता सो रहे होंगे तब 25 जुलाई के दिन नाग-पंचमी मनाई जायेगी | नाग जिसे लोग प्रायः साँप समझते हैं लेकिन वास्तविक नाग ...... 33 कोटि देवताओं में एक देवता नाग भी हैं |  यदि साँप अर्थ लिया जाये तो साँप सोते नहीं हैं और यदि नाग का अर्थ प्राणों के विविध-नाम लें तो यह प्राण भी कभी नहीं सोता ....यदि किसी व्यक्ति के शरीर का यह "नाग" नामक देवता सो जाये तो उसका प्राणान्त हो जाएगा ........ इसलिए जागे हुए को सोया हुआ नहीं कहना चाहिए |  
4) 3 अगस्त के दिन रक्षाबन्धन है, पूर्णिमा का दिन है और इसी दिन भगवान् विष्णु जी का हयग्रीव-अवतार हुआ था | हयग्रीव अर्थात् सिर घोड़े का और शरीर मनुष्य का और ये विष्णु जी के पांचवें अवतार थे .... लेकिन जब विष्णु जी सो गए तो अवतार कैसे लिया ? हयग्रीव जी के जन्म से पूर्व भी विष्णु जी सोये ही होंगे फिर जन्म कैसे ?
5) 11 अगस्त के दिन श्रीकृष्ण-जन्म-अष्टमी है | श्री कृष्ण जी भगवान् विष्णु के 8वें अवतार थे और उनका जन्म भी विष्णु जी के सोने के बाद हुआ | ये सारी घटनायें बतला  रही हैं की चार-हाथ वाले विष्णु-जी जो चित्र में दिखाये जाते हैं वे तो जरूर सोते होंगे लेकिन चर-अचर-जगत् का पालन करने वाला=विष्णु कभी नहीं सोता 
6) 29 अगस्त के दिन वामन-जयन्ती है, इसी दिन विष्णु जी के अन्य रूप वामन का अवतार हुआ था तो जब विष्णु जी सो रहे थे तो ये अवतार कैसे हो गया ? 
7) 1 सितम्बर के दिन अनन्त चतुर्दशी है और इस दिन लोग सोये हुए विष्णु जी के अनन्त रूप का पूजन करते हैं यह भी विचित्र है | कोई भी व्यक्ति अपनी सोयी हुई माँ से खाना तक नहीं माँगता और लोग सोये हुए विष्णु जी का पूजन करते हैं यही विचित्रता है |


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*मातंग चांडालपुत्र से ब्राह्मण बने?*

जब भी *हिंदू धर्म* में व्याप्त जाति व्यवस्था पर वार्तालाप की जाती है प्राय: जाति परिवर्तन के अनेकों उधारण दिये जाते हैं और ये संदेश दिया जाता है कि जाति बदली जा सकती है। हम अपने इस लेख और आने वालें लेखों में कुछ ऐसे ही उधारणों पर चर्चा करेंगे।

*मतंग(ना की मातंग) ऋषि* की कथा विस्तार से महाभारत के अनुशासन पर्व *(अध्याय 27 से 29)* में आती है। उसमे आता है कि *मतंग ऋषि* एक *ब्राह्मणी* के पेट से *शूद्रजातीय नाई* द्वारा पैदा किए गए एक चांडाल है *(अनुशासन पर्व अध्याय 27 श्लोक 17)*। शूद्र वर्ण में जन्मे *मतंग ऋषि* घोर तप करते हैं। उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर *इन्द्र* उनके पास कई बार आते है और वर मांगने के लिए कहते है। मतंग वर मांगते है कि *“मैं ब्राह्मण बन जाऊं* । इस पर इंद्र बार-बार इसे छोड़ कर कोई अन्य वर मांगने के लिए कहते हैं।

*इन्द्र* का कहना है कि:

चण्डालयोनौ जातेन नावाप्यं वै कथंचन
*[महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 29 श्लोक 4]*

*(अनुवाद:-)* चाण्डाल की योनि में जन्म लेने वाले को किसी तरह भी ब्राह्मणत्व नहीं मिल सकता।

मतंग ब्राह्मणत्वं ते विरुद्धमिह दृश्यते।
ब्राह्मणयं दुर्लभतरं
*[महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 29 श्लोक 8]*

*(अनुवाद:-)* मतंग इस जन्म में तुम्हारे लिए ब्राह्मणत्व की प्राप्ति असंभव दिखायी देती है। ब्राह्मणत्व अत्यंत दुर्लभ है।

लेकिन मतंग नहीं मानते। इन्द्र चले जाते हैं। ऐसा कई बार होता है। अंतिम बार इंद्र आते हैं। मतंग पहले सा आग्रह नहीं करते वह अन्य वर मांगते हैं। वह कहते हैं-

यथा कामविहारी स्यां कामरूपी विहड्नमः।
ब्रह्मक्षत्राविरोधेन पूजां च प्राप्नुयामहम् ॥

यथा ममाक्षया किर्तिर्भवेच्चापि पुरंदर ।
कर्तुमर्हसि तद् देव शीरसा त्वां प्रसादये ॥
*[महाभारत अनुशासन पर्व अ० 29 श० 22-23]*

*(अनुवाद:-)* देव पुरंदर आप ऐसी कृपा करें, जिससे मैं इच्छानुसार विचरनेवाला तथा अपनी इच्छा के अनुसार रूपधारण करने वाला आकाशचारी देवता होऊँ । ब्राह्मण और क्षत्रियों के विरोध से रहित हो मैं सर्वत्र पूजा एवं सत्कार प्राप्त करूँ तथा मेरी अक्षय किर्ति का विस्तार हो। मैं आपके चरणों में मस्तक रख कर आपकी प्रसन्नता चाहता हूँ। आप मेरी इस प्राथना को सफल बनाइये ।

इंद्र वर देते हुए कहते हैं-

छंदोदेव इति ख्यातः स्त्रीणां पुज्यो भविष्यसि।
किर्तिश्र्च ते तुला वत्स त्रिषु लोकेषु यास्यति॥
*[महाभारत अनुशासन पर्व अ० 29 श० 24]*

*(अनुवाद:-)* इंद्र ने कहा–वत्स ! तुम स्त्रियों के पूजनीय होओगे। छंदोदेव के नाम से तुम्हारी ख्याति होगी और तीनों लोकों में तुम्हारी अनुपम किर्ति का विस्तार होगा।।

स्पष्ट है की मतंग चांडाल से ब्राह्मण नहीं बना ।इसी बात को 29 वे अध्याय के 26 वें श्लोक में दोहराया गया है-

एवमेतत् परं स्थानं ब्राह्मण्यं नाम भारत।
तच्च दुष्प्रापमिह वै महेंद्रवचनं यथा॥  
*[महाभारत, अनुशासन पर्व]*

*(अनुवाद:-)* भारत ! इस तरह यह ब्राह्मणत्व परम उत्तम स्थान है। जैसा की इंद्र का कथन है, यह इस जीवन में दूसरे वर्ण के लोगों के लिए दुर्लभ है।

*आर्यसमाजियों की धोकेभाज़ी- मूल मंत्र में हेराफेरी*

इतनी स्पष्ट मतंगकथा के होते हुए भी किस तरह लोग भ्रांति में पड़ते हैं। इस का कारण *स्वामी दयानंद* जी का *सत्यार्थ प्रकाश* है, जिस में लिखा है-“ महाभारत में *मातंग* ऋषि चांडाल कुल से *ब्राह्मण* हो गए थे।” *(चतुर्थ समुल्लास)*। इस बात को पुष्ट करने के लिए *सत्यार्थप्रकाश* के *आर्यसमाज* शताब्दी संस्करण (रामलाल कपूर ट्रस्ट प्रकाशन) के पृष्ठ 141 पर पादटिप्पणी में संपादकों ने महाभारत ,अनुशासन पर्व (3/19) का एक श्लोक,बिना अर्थ लिखे ,अंकित कर दिया है-

स्थाने मातंगो ब्राह्मण्यमलभद् भरतर्षभ,
चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमवाप्तवान्

कुछ ऐसा हि प्रयास *सत्यार्थप्रकाश* मानक संस्करण( श्रीमद् दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास ) द्वारा किया गया। इस संस्करण में विशेष टिप्पणी भाग *पृष्ठ 27* में *मतंग* ऋषि के प्रकरण पर यह टिप्पणी बिना अर्थ के की गयी है-

स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यमलभद् भरतर्षभ,
चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमवाप्तवान् *
[महा,अनु (3/19)]*

इसी पथ पर चलते हुए कुछ वीरों ने (या कहिए झूठो ने) भी वीरता (पढ़िये कायरता) दिखाने की कोशिश की है:

पादटिप्पणी में गायब है। अर्थ वैसे ही नहीं लिखा था। आर्यसमाजियों की बोधिक ईमानदारी का अंदाजा पाठक स्वयं लगा सकते हैं। अब यह जिज्ञासा बनी रहती है कि वास्तव में इस श्लोक का क्या अर्थ है। प्रकरण विश्वामित्र का चल रहा है। अध्याय के अंत में युधिष्ठिर का प्रश्नात्मक कथन है।

स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यं नालभद् भरतर्षभ,
चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमवाप्तवान्   
*[महा, अनु (3/19)]*

*प्रमाण*

*1.गीता प्रैस गोरखपुर महाभारत हिन्दी अनुवाद सहित पृ. 5439*

इस का अर्थ प्रकरण में इस तरह आता है: भरतश्रेष्ठ, मतंग को जो ब्राह्मणत्व नहीं प्राप्त हुआ,यह उचित ही था,क्योंकि उस का जन्म चांडाल की योनि में हुआ था,परंतु विश्वामित्र ने कैसे ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लिया ?

*स्वामी दयानंद* का कथन महाभारत के उपरोक्त विवरण के बिलकुल विपरीत होने के कारण निराधार और कपोलकल्पित है। यहा स्पष्ट है की *मतंग* ब्राह्मण नहीं बनते, इस *श्लोक* में *विश्वामित्र* जी का भी उल्लेख किया गया है। इसकी यथार्थता हम इस श्रंखला के अगले लेख में देखेंगे।
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