Thursday, 18 June 2020

(D) घूँघट, सती, विधवा विवाह, वाईफ स्वैपिंग, संतानें।

घूँघट

ऋग्वेद मे लिखा है की, “ ईश्वर ने तुम्हे औरत बनाया है, इसलिये तुम अपनी #आंखे झुकी रखा करो, #पुरुषो की तरफ मत देखा करो ! अपने #पैर‌ एक दूसरे से सटा के रखो, और अपने #वस्त्र मत खोलो , खुद को #घूँघट मे छुपा के रखा करो”0
(ऋग्वेद 8, 33, मंत्र 19-20)

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घूँघट, पर्दा

घूँघट, संस्कृत के अवगुण्ठन शब्द से आया है जिसका मतलब होता है वील, क्लोक, कवर, हाईड।

In the Rig Veda, Adhivastra denotes the outer cover (veil).
In the Atharvaved Veda, Upavasana, denotes veil.

सीता जी अपने देवर लक्ष्मण जी से भी परदा करती थी। जब लक्ष्मण जी से माता सीता को जंगल से वापिस लाने को कहा तो लक्ष्मण जी ने जवाब दिया था कि मैं सीता जी को नही ला सकता क्योंकि मैंने माता सीता का चेहरा ही नही देखा इसलिए मै उन्हें नहीं पहचानता।

वाल्मीकि रामायण (5सदी BC) में राम सीता को घूँघट हटा कर प्रजा को चेहरा दिखाने को कहते है वनवास पर जाने से पहले। रावण के मरने पर उसकी पत्नियां और पटरानी मंदोदरी, बिना घूँघट के दौड़ कर रावण के शव के पास इकट्ठा हो जाती है।

रामचरितमानस में सीता को दशरथ और अन्य से घूंघट करने का वर्णन है।

उत्तर गुप्त काल मे घूँघट किया जाता था। शूद्रक की मृच्छकटिका (5 सदी BC) में घूँघट का उल्लेख है। कालिदास के अभिज्ञानशाकुनतलम (3-4 सदी) में घूँघट करने का उल्लेख है। और उसी समय के कई महाकाव्यों में भी इसका उल्लेख मिलता है।

• गुप्ता या मौर्य काल के घूँघट किए हुए स्त्री उकेरे गए सिक्के भी पाए गए है।

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सती प्रथा

सती नाम सती देवी के लिए आता है जिसने खुद को जला लिया था अपने पिता द्वारा स्वयं और पति शिव का अपमान होने पर। सती शब्द का संस्कृत में प्रयोग ही अच्छी पत्नी के लिए होता था।

पांडु के मौत के बाद माद्री सती हुई थी। मेघनाथ की मौत के बाद सुलोचना सती हुई थी।

3rd सदी सदी में गुप्ता काल मे सती का प्रचलन अधिक था जिसके साक्ष्य मौजूद है। सती पिल्लर्स ऑफ एरन (9वी सदी) पर सती का उल्लेख मिलता है। कलचुरी साम्राज्य (9वी शताब्दी, आज का छत्तीसगढ़ क्षेत्र) में बहुविवाह और सती प्रथा का प्रचलन था। राजा गांगेयदेव के साथ 11 वी सदी में 100 रानियों सती हुई थी।

राजा राममोहन राय ने मुग़लो या मुसलमानों को दोष नहीँ दिया इसका। बल्कि 1829 में अपने ही समाज से इसके विरुद्ध लड़ाई लड़ी।

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♟ *वेदों में सती प्रथा देखो*

*“इमा नारी ---------जनयो योनिमग्र।।"*
*(ऋग्वेद 10 /18/7)*
अर्थात = ये नारियां (पति के साथ) जल रही है, अत: पति का साथ होने के कारण अविधवा है । इन के शरीर पर घी मला हुआ है, आंखो मे अंजन  (सुरमा) लगा है ।ये आंसूशनय है । हे अग्नि ये तुम मे प्रवेश कर रही है । ताकि ये निर्दोष और सुंदर नारिया अपने पतियो से वियुक्त न हो ।

 ♟ *रामायण मे सती प्रथा देखो :*
वेदो की सती प्रथा समर्थन रामायण ने भी किया देखो जरा गौर से पढो :-
दशरथ की मृत्यु के पश्चात माता कौशल्या कहती है कि, "मे महाराज के शरीर को आलिंगन कर अग्नि मे प्रवेश करूंगी ।
*( वाल्मिकी रामायण अयोध्या कांड 66 / 12)*

♟  सीता को रावण जब राम का माया निर्मित कटा सिर दिखाता है तब वह कहती है कि, “ रावण, मे अपने पति के साथ सती हो जाऊगी ।"
*(वाल्मिकी रामायण युद्ध कांड 32 / 32)*

♟ *महाभारत मे सती प्रथा देखो :-*
महाभारत मे भी वेदो की सती प्रथा का समर्थन किया :-
पांडवो का पिता राजा पांडु उस की मृत्यु पर उस की एक पत्नी माद्री ने पति के शव के साथ अपने आप को जलाया था।

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*क्या सतीप्रथा मुस्लिम आक्रमण के कारण शुरु हुई थी?*

अमानविय धर्म कि इज्जत बचाने वाले संघी मनुवादी, कथावाचक बाबा पंडे पुरोहित,दयानंदी इन सबका सती प्रथा पर मत है कि ऐसी कोई प्रथा हिंदु धर्म मे थी हि नही. मुस्लिम आक्रमणकारी हिंदु स्त्रीयों को उठा ले जाते थे इसलिए मजबुरी से यह प्रथा शुरु हुई. लेकिन क्या यह बात सही है? या फिर ये अपने अमानविय धर्म कि इज्जत बचाने कि एक धुर्त निती है ? चलिए जानते है.

*#ऐतिहासिक_प्रमाण* 

सतीप्रथा का पहला ऐतिहासिक प्रमाण गुप्तकाल का मिला है.

*महाराज भानुप्रताप  के सैनिक गोपराज कि युद्ध मे मृत्यू होने पर उसकी पत्नी सती होती है.*

इस प्रथा का प्राचिनतम ऐतिहासिक प्रमाण इ.स. 510 मे मिला है.

ऐरण के शिलालेख मे सतीप्रथा का गौरवपूर्ण उल्लेख किया गया है.

*(अर्लि इंडीया,रोमिला थापर पृष्ठ 237)*

*मुस्लिम आक्रमण* आठवी सदी से शुरु हुये थे लेकिन *सतीप्रथा* के ऐतिहासिक प्रमाण हमे मुस्लिम आक्रमण के सेकडो साल पहले के मिले है. इससे सिद्ध है कि इस प्रथा का मुस्लिम आक्रमण से कोई संबंध नही है. कुछ लोग कहेंगे कि यह एक सामाजिक कुप्रथा थी इसका धर्म से कोई लेना देना नही. लेकिन यह बात भी गलत है. *प्रमुख हिंदु धर्मग्रंथो मे सती प्रथा का स्पष्ट उल्लेख किया गया है.*

*#वेद*
*अथर्ववेद का एक मंत्र देखे*
इयं नारी पतिलोक वृणाना निपद्दत उप त्वा मर्त्य प्रेतम् धर्म॔ पुराणमनुपालयंती तस्यै प्रजां द्रविणं चेह धेहि. *(अथर्ववेद : 18/3/3)*
*(अर्थात:-)* यह नारी स्वर्ग अर्थात पतिलोक को प्राप्त करणे कि इच्छा से हे मनुष्य तुझ मृत के समिप पोहचती है.तुम्हारे साथ जल मर रही है,यह ऐसा पुरातन धर्म का पालन करती हुई कर रही है. इस तरह तुम्हारे साथ मर रही इस स्त्री को जन्मांतर मे इस लोक और परलोक मे भी तुम पिता पौत्र धन प्रदान करना.

*ऋग्वेद मे देखे*
इमा नारीरविधवा: सुपत्नीरांजनेन सर्पिषा संविशंतु अनश्रवोsनमिवा: सुरत्ना आरोहंतु जनयो योनिमग्रे., *(ऋग्वेद 10/18/7)*
*(अर्थात:-)* ये नारीयां पति के साथ जल रही है, अंतः पति के साथ होने के कारण अविधवा है. इस के शरीरो पर घी मला हुआ है.आखो मे अंजन लगा है.ये आंसशुन्य है, हे अग्नि ये तुम में प्रवेश कर रही है. ताकी ये निर्दोष और सुंदर नारीयां अपनी पतीयों से वियुक्त ना हो.

*#रामायण_महाभारत*
रामायण महाभारत मे भी सती प्रथा का उल्लेख मिलता है
*दशरथ* के मृत्यू के बाद कौशल्या सती होने जा रही थी लेकिन बाकी स्त्रीयो ने उसे रोक लिया.
मै महाराज के शरीर को आलिंगन कर अग्नी मे प्रवेश करुंगी
*(वाल्मिकी रामायण,अयोध्याकांड 66/12)*

*कृष्ण* के मृत्यू के बाद उनकी 5 रानीयां सती हुई थी 
रुक्मिणी,गांधारी,शैव्या,हैमवती और जांबवती ने पतिलोक कि प्राप्ती के लिए अग्नी मे प्रवेश किया. *(महाभारत,मौसलपर्व 7/73)*

*यह हो गया ग्रंथो का मत जमिनी स्तर पर हकीकत यह थी अगर कोई स्त्री सती होने से इंकार कर दे तो उसे भांग पिलाकर या हाथ पैर बांध कर चिता पर फेका जाता था.*

राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध समाज को जागरूक किया। जिसके फलस्वरूप इस आन्दोलन को बल मिला और तत्कालीन अंग्रेजी सरकार को सती प्रथा को रोकने के लिये कानून बनाने पर विवश होना पड़ा था। *अन्तत: उन्होंने सन् 1829 में सती प्रथा रोकने का कानून पारित किया। इस प्रकार भारत से सती प्रथा का अन्त हो गया।*

*अंतः यह सिद्ध है कि सती प्रथा हिंदुओ कि धार्मिक प्रथा थी इसका मुस्लिम आक्रमण से कोई लेना देना नही है. संघी मनुवादी,कथावाचक बाबा पंडे पुरोहित,दयानंदीओ द्वारा इसे मुस्लिम आक्रमण के साथ जोडना अमानविय धर्म कि इज्जत बचाने का एक असफल प्रयास है*

*(महाभारत आदि पर्व 125/19)*

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*सतीप्रथा*
ब्राह्मणों ने विधवा औरतों से निपटने और जाति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए दूसरा रास्ता सती प्रथा निकाला।


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*विधवा विवाह प्रथा*
विधवा विवाह निषेध कर दिया गया। अगर कोई विधवा किसी विवाह योग्य लडके से शादी कर लेती है तो समाज में एक लड़का कम हो जायेगा,और जिस लडकी के लिए लड़का कम होगा वो लडकी जाति से बाहर जा कर शादी कर सकती है। इससे भी जाति प्रथा को खतरा था तो विधवा विवाह भी निषेध कर दिया गया था। जाति अंतर्गत विवाह जाति बनाये रखने का सूत्र है और जाति व्यवस्था बनाये रखने‌ के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था को बनाये रखने के लिए विधवाओं पर मन मने अत्याचार होते थे। ब्राह्मणों ने देखा कि विधवा को टिकाये रखना संभव नहीं है तो विधवाओं के लिए नए क़ानून बनाये गये। विधवा सुन्दर नहीं दिखनी चाहिए इसलिए उनके बाल काट दिए जाते थे। कोई उनकी ओर आकर्षित ना हो जाये इस लिए उनको साफ़ सफाई से रहने का अधिकार नहीं था। ताकि कोई उनके साथ शादी करने को तैयार ना हो जाये। यानी किसी भी स्थिति में जाति-व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।


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*Wife swapping*
महाभारत उद्योगपर्व  45/12 मे सच्चे मित्र के 6 गुण बताये गये है इसमे 6 वा गुण है कि  मित्र के मांगने पर उसके हित के लिए अपनी पत्नी को भी निछावर कर देना चाहिये यानी कि मित्र के मांगने पर अपनी पत्नी को उसे सेक्स के लिए देना।
चाहिये.


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*सन्तान के विषय में वेद*

ऋग्वेद 1.164.32
बहुप्रजा निर्ऋतिमा विवेश ।
अर्थात् बहुत सन्तान वालों को बहुत दु:ख उठाना पड़ता है।।

इसलिए ऋग्वेद 3.1.6 में आज्ञा देते हैं कि
"सना अत्र युवतय: सयोनीरेकं गर्भं दधिरे सप्त वाणी: "
अर्थात् सप्तपदी (विवाह) की हुई युवती स्त्रियाँ एक ही गर्भ धारण करें।।

ऋग्वेद 7.4.8 में कहा गया है--
नहि ग्रभायारण: सुशेवोऽन्योदर्यो मनसा मन्तवा उ अघा चिदोक: पुनरित्स एत्या नो वाज्यभीषाडेतु नव्य।।
अर्थात् दूसरे के पेट से जो उत्पन्न हुआ है उसको कभी अपना पुत्र न समझे | अन्योदर्य पुत्र का मन सदैव वहीं जायेगा जहाँ से वह आया है , इसलिए अपने
ही पुत्र को पुत्र समझना चाहिए ।
(सन्तान गोद लेने का निषेध , surrogacy का भी निषेध समझें)

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