कज़िन मैरिज हिन्दू समाज में।
अगर बात दूसरे धर्म की करे तो उसमें कोई सीमा ही नहीं। दलित समाज मे कज़िन मैरिज होती है। देश में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में तो मामू, भांजी का विवाह आम है। उत्तर भारत के हिन्दू भाई अक्सर मुस्लिमो द्वारा चचेरी,ममेरी, मौसेरी, फुफेरी कज़िन के साथ विवाह की प्रथा को बड़ी गिरी हुई नजर से देखते हैं, और इस बात को लेकर मुस्लिमों पर गन्दे कटाक्ष भी करते हैं, पर जहां तक मैं जानता हूं तो वो ये कि हर धर्म ने इस विवाह की अनुशंसा की है, महात्मा बुद्ध की पत्नी यशोधरा उनके सगे मामा और सगी बुआ की बेटी थीं, और स्वयं श्रीकृष्ण जी ऐसे विवाह के पक्ष मे थे . कृष्ण जी ने अपनी बहन सुभद्रा का विवाह अपनी सगी बुआ के पुत्र अर्जुन से करवाया था ! अर्जुन सुभद्रा के सगे फुफेरे भाई थे, और सुभद्रा अर्जुन की सगी ममेरी बहन थीं, नीचे लिखे प्रमाणों से ये बात भली प्रकार सिद्ध होती है :-
1- वसुदेव एक यदुवंशी जिनके पिता का नाम शूर और माता का नाम मारिषा था।
*. ये मथुरा के राजा उग्रसेन के मन्त्री थे। पांडवों की माता कुंती वसुदेव की सगी बहन थी ।
http://bharatdiscovery.org/india/वसुदेव
2- पृथा (कुंती) महाराज शूरसेन की बेटी और वसुदेव की बहन थीं। शूरसेन के ममेरे भाई कुंतिभोज ने पृथा को माँगकर अपने यहाँ रखा। इससे उनका नाम 'कुंती' पड़ गया, कुंती भगवान श्रीकृष्ण की बुआ थीं। कुन्ती को इन्द्र के अंश से अर्जुन का जन्म हुआ।
http://bharatdiscovery.org/india/कुन्ती
3- सुभद्रा कृष्ण की बहिन जो वसुदेव की कन्या और अर्जुन की पत्नी थीं। इनके बड़े भाई बलराम इनका ब्याह दुर्योधन से करना चाहते थे पर कृष्ण के प्रोत्साहन से अर्जुन इन्हें द्वारका से भगा लाए। सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु , महाभारत के प्रसिद्ध योद्धा हैं।
http://bharatdiscovery.org/india/सुभद्रा
अर्जुन और सुभद्रा के विवाह की यही बात भागवत पुराण से भी सिद्ध होती है [ Shrimad Bhagvat. Skandh-9 . Paath-24. Shlok- 28-29 . Page-534/535 ]
इसके अलावा एक अन्य उदाहरण भी कज़िन मैरिज का यहाँ मिलता है।
विराट नरेश की एक बेटी थी जिसका नाम उत्तरा था, और एक बेटा था जिसका नाम उत्तर था. अर्जुन के बेटे अभिमन्यु का विवाह उत्तरा से हुआ जिससे उनके यहाँ एक बेटा पैदा हुआ जिसका नाम परिक्षित रखा गया . परिक्षित ने अपने मामा उत्तर की बेटी इरावती से विवाह किया ।
[ Shrimad Bhagvat. Skandh-1 . Paath-16 . Shlok- 2 . Page- 63 ]
http://www.vedpuran.com/brahma.asp?bookid=9&secid=1&pageno=00l&Ved=Y&PuranName=Bhagvat
हमारे ही देश के तीन राज्यों कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु यानि पूरे दक्षिण भारत मे हिन्दू जातियों के लोग ही बड़े पैमाने पर अपने कज़िन्स तो कज़िन साथ ही मुस्लिमों से एक हाथ आगे बढ़कर अपने सगे चाचा मामा आदि से शादी कर लेते हैं।
http://en.wikipedia.org/wiki/Cousin_marriage?seg=1#Tamil_Nadu.28Hindu.29
गौरतलब है कि इस्लाम मे सगे चाचा मामा आदि से विवाह सख्ती से मना है, क्योंकि चाचा मामा बहुत निकट रक्त सम्बन्धी हैं, जिनसे विवाह करने पर बच्चों मे जन्मजात व्याधियां पैदा हो जाती हैं।
-Zia
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●● *सगे भाई बहन बन सकते है ‘पति-पत्नी’ : वेद में लिखा है* ●●
**वेदों में याम और यमी आपस में भाई बहन है इन दोनों की अश्लीलता देखिये ........... " क्या एक भाई बहन का पति नही बन सकता ..... मै वासना से अधीन होकर यह प्रार्थना करती हू कि तुम मेरे साथ एक हो जाओ और रमण करो ..... वाह रे ज्ञान के भंडार .......!!!!! वेदों के हिमायतियों को भाई बहन का त्यौहार **रक्षा बंधन ** से दूर ही रहना ठीक होगा |
***इसके साथ ही वेदों की कुछ ऋचाओं में देवता उपस्थित है , कुछ में नही | कुछ में पुजारी उपस्थित है कुछ में नही | किसी ऋचा में देवता की स्तुति की गई है , तों किसी ऋचाओं में केवल याचना | कुछ में प्रतिज्ञाए की गई है , तों कुछ ऋचाओं में श्राप दिए गए है | कुछ ऋचाओं में दोषारोपण किया गया है और कुछ में विलाप किया गया है | कुछ ऋचाओं में इन्द्र से शराब और मांसाहार के लिए प्रार्थना की गई है |
वेदों में यह विभिन्नताए यह प्रमाणित कराती है की ये ऋचाए भिन्न -भिन्न ऋषियों ( 99% ब्राहमणों ) की रचना है | और हर ऋषि का अपना एक देवता है जिससे वह ऋषि अपनी इच्छा पूर्ति की प्रर्थना करता है | वेदों में न कोई आध्यात्म है, न कोई ज्ञान विज्ञान ,और न कोई नैतिकता |बल्कि अश्लीलता और पाखण्ड ,शराब पीने और मांसाहार करने का भरपूर बोलबाला | कोई महामूर्ख ही वेदों को ज्ञान -विज्ञान का भंडार कह सकते है|
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■ *अपनी बेटी से बलात्कार करने वाला, जगत रचयिता : ब्रह्मा*
'ब्रह्मा'शब्द के विविध अर्थ देते हुए श्री आप्र्टे के संस्कृत-अंग्रेजी कोष में यह लिखा है- पुराणानुसार ब्रह्मा की उत्पति विष्णु की नाभि से निकले कमल से हुई बताई गई है उन्होंने अपनी ही पुत्री सरस्वती के साथ अनुचित सम्भोग कर इस जगत की रचना की पहले ब्रह्मा के पांच सर थे,किन्तु शिव ने उनमें से एक को अपनी अनामिका से काट डाला व अपनी तीसरी आँख से निकली हुई ज्वाला से जला दिया. *( श्रीमद भगवत, तृतीय स्कंध, अध्याय १२ )* में लिखा है---
वाचं.................प्रत्याबोध्नायं ||२९|| अर्थात : मैत्रेय कहते है की हे क्षता(विदुर)!हम लोगों ने सुना है की ब्रह्मा ने अपनी कामरहित मनोहर कन्या सरस्वती की कामना कामोन्मत होकर की ||२८|| पिता की अधर्म बुद्धि को देखकर मरिच्यादी मुनियों ने उन्हें नियमपूर्वक समझाया ||२९||क्या यह पतन की सीमा नहीं है.? इससे भी ज्यादा लज्जाजनक क्या कुछ और हो सकता है.?
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*वैदिक-मनु-आर्यों में शादी के रिवाज, सगे संबंधियों से संभोग, हत्या*
वैदिक-आर्य-मनु-ब्राह्मणों में बहन-बेटी-पौती व माँ से शादी करने का रिवाज माना जाता रहा है।
*मनु-आर्यों में बाप-बेटी में शादियाँ होने का रिवाज:;*
वशिष्ठ ने अपनी बेटी सतरुपा से शादी की,मनु ने अपनी बेटी इला से, जान्हु ने अपनी बेटी जान्हवी से, सूर्य ने अपनी बेटी उषा से, ब्रह्मा ने अपनी बेटी सतरुपा व सरस्वती से और हिरण्य-कश्यपु ने अपनी बेटी रोहनी से शादी की।
*चाचा-भतीजी में शादी:*
धर्मा ने अपने भाई दक्षा की 10 बेटियों से शादी की!
*दादा-पौती के बीच शादी-*
दक्षा ने अपनी बेटी अपने बाप ब्रह्मा को दे दी, इनके विवाह से नारदमूनि पैदा हुए।
दौहित्रा ने अपनी 27 बेटियों को अपने बाप सोमा को सहवास करने व औलाद पैदा करने के लिये दे दी।
*मनु-आर्यों में भाई-बहन की शादियां:;*
पुशन ने अपनी बहन अछोदा से, पुरुकुत्स ने अपनी बहन नर्मदा से, विप्राचिति ने अपनी बहन सिंहका से, नाहुसा ने अपनी बहन विरजा से, सुक्रउसना ने अपनी बहन गो से, अमसुमत ने अपनी बहन यसोदा से, दसरथ ने अपनी बहन कौशल्या से, सुका ने अपनी बहन पिराली से तथा द्रोपद ने अपनी बहन प्रस्ती से शादी की। ब्रह्मा के तीन में से एक बेटे दक्षा ने अपनी बहन से शादी की। बोद्ध-रामायण के अनुसार सीता राम की बहन थी। (कम्ब-रामायण में रावण की प्रेमिका सीता और जैन-समाज की चराउ-पंउम में सीता को गणिका (बदचलन) माना गया है.)
*(Dr. BR-Ambedkar voll 4,p.297,325, volume 3 p.155)*
ऋग्वेद में भी यमी अपने भाई यम को सम्भोग के लिये उकसाती है। इनके बीच बातचीत का सैक्सी विवरण ऋग्वेद में पढें और इससे भी ज्यादा अश्लील संवाद सूर्य व पुशन के बीच तथा इन्द्र व इन्द्राणी के बीच पढे जा सकते हैं।
(RV-Mandal X;S85, 37, 86, 06)*
*वैदिक-आर्यों में बेटा अपनी माँ से संभोग कर सकता था।*
पुशन ने अपनी माँ से, मनु ने अपनी माँ सतरुपा व श्रद्धा से सम्भोग किया। ब्रह्मा मनु का पिता और सतरुपा मनु की माँ भी बताई जाती है। जबकि सतरुपा मनु की बीवी भी है। इससे स्पष्ट होता है कि बाप और बेटे दोनों मिलकर एक ही औरत से शारीरिक रुप से भागीदारी करते थे।
*अनेक बाप होने तथा दादा-पौती की शादी-*
हरिवंश-पूराण के दूसरे अध्याय से पता चलता है कि सोमा के दस बाप थे। (जब्कि हनुमान के भी चार बाप बताए जाते हैं।) सोमा के मरिशा नाम की बेटी थी, सोमा ने अपने दस पिताओं के साथ अपनी बेटी मरिशा के साथ सम्भोग किया तथा सोमा के बेटे दक्ष-प्रजापति ने अपनी 27 बेटियों को अपने बाप सोमा को संभोग व औलाद पैदा करने के लिये सौंप दिया।
*(Dr. BR-Ambedkar voll 4, p.296,297)*
*हत्या व बलात्कार:-*
इंन्द्र पर आरोप लगे हैं कि उसने अपनी माँ के साथ बलात्कार कर के अपने पिता की हत्या की। इंन्द्र ने उषा व अहल्या के साथ बलात्कार किया। विष्णु ने वृंदा व तुलसी से बलात्कार किया। इंन्द्र पराजित होने वाले लोगों की सम्पत्ति व उनकी बीवियों को लूटा करता था।
*(Dr. Deviprasad-Chattopadhyaya Bhartiya-Darsan p.78-79)*
*पार्वती से मिलने के लिए, शिव ने अपने पुत्र गणेश का ही सिर काट दिया था।*
*सौतेली माँ व बेटे/ शिष्य के बीच नाजायज सम्बन्ध:-*
कृष्ण के बेटे सांबा ने कृष्ण की बीवियों से अनैतिक सम्बन्ध बनाए तो कृष्ण ने अपने बेटे सांबा व अपनी बीवियों को खूब भला-बुरा कहा। कृष्ण के दूसरे बेटे प्रद्युमन ने अपनी दायी-माँ (गुरु की बीवी) से विवाह किया।
*(Dr. BR-Ambedkar vol. 4, p.304)*
*दूसरे की पत्नी व कुवाँरी-लडकियों से बच्चे पैदा करना:-*
पूराणों में गणेश को शिव के अतिरिक्त ब्रह्मा का बेटा भी बताया गया है। जबकि गणेश की माँ शिव की पत्नी पार्वती को ही माना गया है और ब्रह्मा व पार्वती का बेटा होने के नाते गणेश ने ब्रह्मा क
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